विजय कुमार साव/गोमियां (बोकारो)। रांची में अध्ययनरत गोमियां निवासी छात्र नीरज कुमार (Gomian residential student Niraj Kumar) ने जगत प्रहरी को जानकारी देते हुए बताया कि 26 मई को लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण।
हेल्पिंग हैंड राइजिंग के समन्वयक नीरज कुमार ने जानकारी देते हुए कहा की चांद और सूरज धरती के बीच जब आ जाती है। इस खगोलीय घटना को चंद्रग्रहण कहते हैं। भारत से यह एक उपचंछाया चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा। भारत देश के पश्चिमी इलाकों को छोड़कर ज्यादातर हिस्सों से चंद्रग्रहण देखा जा सकता है। छब्बीस मई को लगने वाली चंद्र ग्रहण का नजारा दोपहर 2:17 बजे से शुरू होकर करीब 5 घंटे रहेगा एवं 7:07 मिनट चंद्र ग्रहण दिखाई देना बंद होगा।
नीरज के अनुसार भारत के अलावे यह चंद्र ग्रहण दक्षिण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, ओशिनिया, अलास्का कनाडा और दक्षिण अमेरिका में भी देखा जा सकेगा। इस चंद्रग्रहण को लोग अपनी खुली आंखों से भी देख सकते हैं। यह चंद्र ग्रहण पूर्ण ग्रहण होगा, जो सुपरमून कहलाता है। इस बार चंद्र ग्रहण पूरी तरह से खून जैसा लाल रंग का दिखाई देगा। नीरज ने बताया कि यह एक खगोलीय घटना है। जब चांद धरती के नजदीक आ जाता है, तब उसका आकार 12 फ़ीसदी बड़ा दिखाई देता है। आमतौर पर चांद से धरती की दूरी 4,06,300 किलोमीटर रहती है लेकिन जब यह दूरी कम होकर 3,56,700 किलोमीटर हो जाती है, उस समय चांद का आकार बड़ा दिखाई देता है। जिसे हम सुपरमून कहते हैं।
ऐसी धारणा है कि लाल रंग के चांद को देखना लोग गलत समझते हैं, लेकिन वैज्ञानिक सत्य है कि धरती के वायुमंडल में मौजूद गैस जो नीले रंग का दिखाई देता है। लाल रंग की वेब लेंथ इसे पार कर जाती है। इसे रेलिंग स्केटरिगं कहते हैं। इसीलिए आसमान में नीला सूर्योदय एवं सूर्यास्त लाल रंग का दिखता है। चंद्र ग्रहण के समय धरती के वायुमंडल से लाल रंग की वेवलेंथ पार करती है। वायुमंडल की वजह से मुड़कर चांद की ओर जाती है। इस तरह नीला रंग फिल्टर हो जाता है। इस कारण चांद लाल रंग का दिखाई देता है।
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