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पीड़िता से मिलने पेंक के गडरूखूंटा पहुंची राष्ट्रीय जनजाति आयोग अध्यक्षा

पीड़िता को न्याय के बदले दोषी के परिजनों को राज्य सरकार दे रही लाभ-आशा लकड़ा

आदिवासियों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा, बांग्लादेशी लुट रहे जमीन-आयोग अध्यक्षा

राजेश कुमार/बोकारो थर्मल (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में नावाडीह प्रखंड के पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र के कडरूखुट्टा गांव की एक 27 वर्षीय आदिवासी महिला के साथ दुष्कर्म का प्रयास के मामले में पीड़िता की शिकायत पर राष्ट्रीय जनजाति आयोग की अध्यक्ष आशा लकड़ा 26 मई को अपने टीम एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ पीड़िता के गांव पहुंचकर भेंट की।‌

आयोग अध्यक्षा लकड़ा ने मामले की जांच के क्रम में पीड़िता एवं आस पड़ोस के रहिवासियों का बयान दर्ज किया और बताया कि, पीड़िता द्वारा आयोग के समक्ष 19 मई को लिखित शिकायत किया गया था। जिसका त्वरित संज्ञान लेते हुए 22 मई को बोकारो जिला उपायुक्त और आरक्षी अधीक्षक से रिपोर्ट मांगा गया था। लेकिन एक सप्ताह के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए आयोग टीम के साथ स्वंय मामले की जांच के लिए आयी है।

उन्होंने बताया कि पीड़िता और संबंधित गांव के रहिवासियों ने बताया कि, घटना के दिन पीड़िता अपने घर के बगल में स्थित तालाब में नहाने गई थी। तभी आरोपी ने आकर उसका कपड़ा फाड़ दिया, मुंह दबा कर पटक दिया और दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता द्वारा हल्ला मचा कर किसी तरह अस्मिता की रक्षा की गई। स्वाभाविक है कि, उक्त घटना का विरोध ग्रामीणों द्वारा किया गया।

आयोग अध्यक्षा लकड़ा ने कहा कि, आश्चर्यजनक है कि, आदिवासीयों के नाम पर सत्तासीन झारखंड के हेमंत सोरेन सरकार के राज में उक्त आदीवासी महिला का सुध नहीं लिया गया। उल्टे आरोपी के परिवार को विभिन्न प्रकार का मुआवजा और नौकरी देने का घोषणा झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी ने आरोपी के घर जाकर किया, क्योंकि आरोपी उनके धर्म का था। लेकिन बगल के गांव की आदिवासी महिला का दर्द जानने का प्रयास नहीं किया गया।

उन्होंने हेमंत सरकार की तुष्टिकरण नीति की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि, आज संथाल परगना, उत्तरी छोटानागपुर, कोल्हान आदि समस्त झारखंड में आदिवासी बहनों की अस्मिता लूटा जा रहा है, लेकिन हेमंत सरकार आदिवासी महिलाओं की अस्मिता की रक्षा करने में पूर्णतया विफल रही है। उन्होंने कहा कि आयोग में पदभार ग्रहण के बाद अभी तक 13 सौ से ज्यादा आदिवासी महिलाओं के साथ उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है। लेकिन झारखंड सरकार गंभीर नहीं है।

इसलिए उक्त मामले में न्यायपूर्ण कारवाई नहीं किया गया तो जिला उपायुक्त एवं आरक्षी अधीक्षक के साथ साथ आवश्यक हुआ तो राज्य के डीजीपी एवं मुख्य सचिव को भी आयोग तलब करेगा और पीड़िता को न्याय दिलायेगा।

इस अवसर पर बोकारो के पूर्व विधायक बिरंची नारायण, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष भरत यादव, श्रवण सिंह, विश्वनाथ यादव, भैरव महतो, फूलचंद किस्कू, अर्जुन सिंह, जयनारायण मरांडी, बालेश्वर मूर्मू, रामचंद्र महतो, सुरेश महतो, शोभी महतो, हरे राम यादव, बसंत राय मुंडा, मनोज महतो, राजेश गिरि, दिलीप तुरी, रवि साव, मनोज पासवान, सुनिता टूड्डू सहित सैकड़ों ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे।

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