हाजी मोहम्मद तकीमुद्दीन के इंतकाल से मुस्लिम समाज मर्माहत-प्रिंस

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। हरदिल अजीज हाजी सैयद मोहम्मद तकीमुद्दीन का बीते 6 अप्रैल को उनके निवास स्थान बोकारो जिला के हद में जारंगडीह (Jarangdih) में इंतकाल हो गया। उनकी उम्र 80 वर्ष से अधिक था। उनके अकस्मात निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। उन्हें 7 अप्रैल की संध्या चार बजे सुपुर्द-ऐ-खाक किया गया।

इस संबंध में उनके पुत्र सैयद मोहम्मद आरिफ ने बताया कि बीते 6 अप्रैल की रात लगभग 11:45 बजे उन्हें हार्ट अटैक होने से घर पर ही इंतकाल हो गया। आरिफ ने बताया कि विगत 25 वर्ष पूर्व उन्हें पहला हार्ट अटैक हुआ था। उसके बाद दूसरा अटैक वर्ष 2018 में हुआ था। बीते रात्रि 11:45 बजे तीसरा हार्ट अटैक होने से इंतकाल घर पर ही हो गया।

इस मौके पर जारंगडीह उत्तरी पंचायत के मुखिया मोहम्मद इम्तियाज, अंजुमन कमिटी के सदर एस एम हारून उर्फ प्रिंस, सेक्रेट्री मो. इम्तियाज़ अंसारी, शिक्षक ललित रजक, समाजसेवी चंद्र मोहन सिंह, श्रमिक नेता बरुण सिंह, कमलेश कुमार गुप्ता, भगवान सिंह, विमल विश्वकर्मा, मुस्लिम समाज के मोहम्मद सिराज, एसएम मतलूब, आदि।

मोहम्मद ताहिर, एस एम अख्तर, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद सब्बीर, मोहम्मद कासीफ, मोहम्मद असगर, मोहम्मद आरिफ के अलावा दिनेश्वर यादव सहित सैकड़ो गणमान्य लोग उनके ज़नाजे में शामिल हुए। संध्या चार बजे मरहूम हाजी मोहम्मद तकिमुद्दीन को जारंगडीह कब्रस्तान में सुपुर्द-ऐ-ख़ाक किया गया।

इस अवसर पर अंजुमन कमिटी (Anjuman committee) जारंगडीह के सदर एसएम हारून उर्फ प्रिंस ने उनके निधन पर कहा कि क्षेत्र में मुस्लिम समाज का एक मजबूत आधार स्तंभ धराशायी हो गया, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है। प्रिंस ने कहा कि उनके इंतकाल से मुस्लिम समाज काफी मर्माहत है।

ज्ञात हो कि, मरहूम हाज़ी तकिमुद्दीन ने वर्ष 2010 में हज के बाद वर्ष 2012 में उमरा कर चुके थे। वे क्षेत्र के रहिवासियों के आदर्श थे। साथ ही बच्चे खासतौर से उन्हें काफी पसंद करते थे।

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