मशरुम की खेती के लिए लगन और धैर्य की जरुरत-किशोरी

बिहार की मशरुम गर्ल जनक किशोरी की जुबानी

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिला (Vaishali district) के हद में बिदुपुर अंचल के ग्राम चकगढ़ो के किसान बाबू रामसेवक शर्मा के अभियंता पुत्र आमोद शर्मा की पत्नी मसरूम गर्ल जनक किशोरी के नाम से जानी जाती है।

अपने ससुर की मृत्यु के बाद इन्होंने चकगढ़ो स्थित अपने 10 कठ्ठा के हलके में स्थित पैतृक मकान को मसरूम फॉर्म का रूप दे दिया है। साथ हीं गांव की खेतीबारी भी सम्भाल रही हैं।

मशरुम गर्ल किशोरी से 9 फरवरी को मुलाकात कर मसरूम की खेती और उनकी सफलता की कहानी के सम्बंध में जानकारी हासिल किया। किशोरी ने बताया कि जेडी वीमेंस कॉलेज पटना से रसायन शास्त्र में प्रतिष्ठा के साथ स्नातक करने के बाद उनकी शादी हो गई।

शादी के बाद पति बाहर नौकरी करते थे। ससुराल में सास ससुर के अलावे दूसरा कोई नही था। शादी के बाद एक लड़का और एक लड़की ने जन्म लिया। बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवार ने पटना में मकान लिया। जहाँ वे अपने बच्चों के साथ रहती थी। कोई आर्थिक समस्या नही थी, जिस वजह अपने समय का उपयोग पढ़ाई में करने लगी।

किशोरी के अनुसार उसने इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से स्नाकोत्तर (PGDRM) में डिप्लोमा किया। साथ ही कृषि विश्वविद्यालय पूसा से मसरूम फार्मिंग का प्रशिक्षण लिया।

हिमाचल प्रदेश के सोलन से मसरूम के क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। बीते 15 वर्षो से मसरूम और food product के उधमियों में किशोरी का एक जाना पहचाना नाम है। ये बिहार महिला उधमी संघ कार्य समिति की सदस्य भी हैं। इसके अलावे कई एक संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं।

इन्होंने बताया कि उनका पुत्र बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से एम टेक (m tek) कर चुका है तथा पुत्री मिलिट्री कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS) अंतिम वर्ष की छात्रा है। इन सब वजहों से सामाजिक क्षेत्र में काम करने का ज्यादा समय मिल जाता है।

कॉलेज और संस्थानों में व्याख्यान और प्रशिक्षण के लिये अपना समय देतीं हूँ। आम जनता को मसरूम की खेती के सम्बंध में जनक किशोरी यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से जानकारी भी देती है।

गांव में आकर खेती-बारी और मसरूम की खेती करने की वजह पूछने पर किशोरी ने बताया कि वे एक किसान की बेटी और बहू हैं। पिछले वर्ष ससुर के श्राद्ध कर्म खत्म होने के बाद गांव के बहुत से लोग उनके पति के पास गांव की जमीन खरीद का प्रस्ताव लेकर आये और कहा कि आपका लड़का भी बाहर रहेगा।

टाटा-पटना में भी मकान है। गांव की संपत्ति सब बेकार हो जाएगी। कोई घर मे दिपक जलानेवाला भी यहां नही है। इन सब बातों से किशोरी को दुःख पहुंचा। किशोरी ने गांव की खेती-बारी के देखभल का खुद जिम्मा लिया। इसी क्रम में पुरखो की हवेली को मसरूम फार्म हाउस का रूप दे दिया।

मसरूम की खेती के लिये पूंजी और जगह के संबंध में पूछने पर किशोरी ने बताया कि मसरूम की खेती 200 रुपये की पूंजी और घर के एक कोने से शुरू की जा सकती है। बस इस काम के लिय लगन और धैर्य की जरूरत है।

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