धारावी के अवैध होटलों में संभावित हादसों का जिम्मेदार कौन?
मुश्ताक खान/ मुंबई। लोअर परेल के कमला मिल कंपाउंड (Kamla Mill Compound) में स्थित मोजोस बिस्त्रा रेस्टोरेंट में भीषण अग्निकांड में 14 लोगों की मौत के बाद मनपा के सबंधित विभागों के अधिकारी हरकत में आए थे। इसके बाद शहर मुंबई सहित उपनगर व ठाणे, पालघर, भिवंडी आदि इलाकों के लगभग सभी होटलों व रेस्टोरेंटों की गहन जांच- पड़ताल भी हुई थी। यह सिलसिला लगभग एक माह तक चला, इसके बाद धीरे-धीरे मुंबईकरों सहित मनपा के अधिकारी व कर्मचारी भूल गए।
जिसके कारण फिर से वैसी ही स्थिति बन गई है। इसे सहज ही अवैध रूप से धारावी में चल रहे होटलों में देखा जा सकता है। इसे देखते हुए मुंबई हाईकोर्ट के एड. निलेश भोसले (Nilesh Bhosle), आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली (Anil Galgali), समीर जावेरी (Samir Zaveri) और आरिफ अंसारी (Arif Ansari) ने मानपा को उपरोक्त गाईडलाइन को फिर से अमली जामा पहनाने का आग्रह किया है। चूंकि ऐसे संभावित हादसों का जिम्मेदार कौन?
गौर करने वाली बात यह है की मनपा द्वारा खाने पीने के होटल व रेस्टोरेंटों के लिए बनाई गई गाईड लाइन को अमली जामा पहनाने में मनपा के अधिकारी पूरी तरह फेल हैं। गाईडलाइन के अनुसार होटल चलाने वालों को राज्य सरकार एवं मनपा, फायर ब्रिगेड, फूड एंड ड्रग्स और लॉक डॉउन के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बह रही है। हालांकि कोरोनाकाल के मद्देनजर राज्य सरकार ने होटल और रेस्टोरेंटों को विभिन्न प्रकार की छूट भी दी है। मसलन होम डिलिवरी, होटल से ग्राहक स्वयं पार्सल ले जा सकता है आदि।
इसके बाद भी नियमों से हट कर चलने वाले धारावी, कुर्ला सहित मुंबई के सभी होटल व रेस्टोरेंटों पर कार्रवाई होनी चाहिए। ताकि लोअर परेल के कमला कंपाउंड स्थित मोजोस बिस्त्रा रेस्टोरेंट या कुर्ला पश्चिम के सिटी किनारा होटल जैसे हादसों को टाला जा सके। चूंकि इस तरह के हादसों में कोई अपना पिता तो कोई भाई, बहन मां या दोस्तों को खो देते हैं।
इस लिहाज से मनपा के सबंधित विभागों को अवैध रूप से चल रहे इस तरह के होटल और रेस्टोरेंटों को तत्काल बंद करा देना चाहिए या फिर उसके मालिकों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। जैसा की मोजोस बिस्त्रा रेस्टोरेंट के मालिक पर हुई थी।
एड्. नीलेश प्रकाश भोसले (मुंबई हाईकोर्ट) ने इस मुद्दे पर कहा की मनपा द्वारा नियम तो बनाए जाते हैं। लेकिन उसे अमली जामा पहनाने वाले अधिकारी अपने पावर का इस्तेमाल करने के बाजाय दूसरी राह पकड़ लेते हैं। ऐसे में अधिकारियों की लापरवाहियों का खामियाजा आम मुंबईकरों को भुगतना पड़ा है। उन्होंने कमलामिल कंपाउंड के रेस्टोरेंट के अलावा झोपड़पट्टियों में चलने वाले अनेक होटल व रेस्टोरेंटों का हवाला दिया। उन्होंने कहा की शहर के किस कोने में क्या चल रहा है इसकी पूरी जानकारी स्थानीय मनपा के वार्ड अधिकारियों को रहती है। इसके बाद भी सब कुछ चल रहा है। इसका मुख्य कारण रिश्वतखोरी व भ्रष्टाचार है।
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने शहर व उपनगरों में होने वाली अग्जनी के मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा की मनपा या राज्य सरकार द्वारा पारित नियमों का पालन कराने में नाकाम अधिकारियों को तत्काल सेवा से छुट्टी दे देनी चाहिए, क्योंकि वे इस योग्य नहीं हैं। उन्होंने कहा बेरोजगारी के इस दौर में उन अधिकारियों की जगह योग्य युवाओं को मौका देना चाहिए। ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा की ऐसे अधिकारियों के कारण विभाग बदनाम होता है और इसके साथ ही असमय लोग काल के गाल में समा जाते हैं, इनका क्या जाता है। गलगली ने कहा की भ्रष्टाचार के दलदल में गोता लगाने वाले अधिकारियों की संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता आरिफ अंसारी के अनुसार धारावी में चल रहे अधिकांश होटल व रेस्टोरेंट महाराष्ट्र सरकार की नियमावली से हट कर चलाई जा रही है। जबकि खाने पीने के होटल या रेस्टोरेंट चलाने के लिए मनपा द्वारा पारित नियमों का पालन करना पड़ता है। इसके अलावा फायर ब्रिगेड और फूड एंड ड्रग्स विभाग की नियमावली भी होती है। लेकिन यहां तो जिओ और जीने दो की राह पर मनपा के अधिकारी चल पड़े हैं। ऐसे में उन्हें गाईडलाइन की परवाह नहीं रहती। इस सबंध में अंसारी ने आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर मनपा आयुक्त, अतिरिक्त मनपा आयुक्त (शहर) और मनपा के उपायुक्त एफ दक्षिण परिमंडल 2 को लिखित पत्र भी दिया है। पत्र में उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के नियमानुसार मुंबई महानगरपालिका के अधिनियमों को भी अंकित किया है। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने से शक की सुई कई संकेत देती है।
आरटीआई कार्यकर्ता समीर जावेरी ने इन दोनों घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा की मनपा के आला कमान अपने अधिकारियों के कारण लाचार हो जाते हैं। नियमों का बनना और उसे अमली जामा पहनाने में समय लगता है। जिसके कारण इस तरह के हादसों पर अब तक लगाम नहीं लगाया जा सका है। जिसके कारण अधिकारियों की लापरवाहियों का खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ता है। इस लिहाज से अब हम सभी मुंबईकरों को सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे स्थानों या होटल, रेस्टोरेंटों में जाने के बाद सबसे पहले नियमावली देखनी चाहिए। इससे पता चलेगा की उक्त होटल सही मायनों में नियमों के अनुसार चल रहा है या नहीं। अगर नहीं तो उसके विरूद्ध कार्रवाई करानी चाहिए। क्योंकि ऐसी घटनाओं में जो मौतें होती हैं उसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।
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