सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में गुवा सेल द्वारा राजाबुरु खदान क्षेत्र में प्रस्तावित नई खनन परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने 75 प्रतिशत रोजगार में प्राथमिकता की मांग तेज कर दी है। इसे लेकर 2 मार्च को स्थानीय मानकी-मुंडा एवं रैयत संघ के बैनर तले 11 गांवों के मुंडा-मानकी प्रतिनिधिमंडल ने जिला मुख्यालय चाईबासा में उपायुक्त चंदन कुमार से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा।
जिला उपायुक्त को सौंपे गये मांग पत्र में कहा गया है कि यह क्षेत्र संविधान की पांचवी अनुसूची तथा पंचायत्स (एक्सटेंशन टू सेडुल्ड एरियाज) एक्ट 1996 (पेसा) के अंतर्गत आता है। प्रस्ताव संख्या-31 के तहत आरोप लगाया गया कि परियोजना की पारंपरिक प्रक्रियाओं में ग्रामसभा से समुचित परामर्श नहीं लिया गया, जो पेसा कानून की धारा 4(1) का उल्लंघन है। प्रस्ताव संख्या-2 में कहा गया कि स्थानीय नियोजन क्षेत्र के सैकड़ों शिक्षित बेरोजगार युवा इस परियोजना से रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन कंपनी की ओर से स्थायी नियुक्ति को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नीति सार्वजनिक नहीं की गई है।
प्रस्ताव संख्या-3 में झारखंड सरकार की निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों में 75 प्रतिशत स्थानीय नियोजन नीति को इस परियोजना में सख्ती से लागू करने की मांग की गई। प्रस्ताव संख्या-4 के तहत सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सीएसआर और डीएमएफटी फंड का पारदर्शी उपयोग प्रभावित गांवों में शिक्षा, शुद्ध पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए किया जाए तथा सीएसआर मद की राशि ग्राम सभाओं की निगरानी में खर्च हो। प्रस्ताव संख्या-5 में कारो नदी के प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि खदान से निकलने वाला प्रदूषित जल, पत्थर, कंकड़, मिट्टी व अन्य अपशिष्ट से नदी बुरी तरह प्रभावित है। ग्रामीण इसी नदी के जल का उपयोग स्नान, धुलाई और पेयजल के रूप में करते हैं, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई।
सौंपे गये मांग पत्र के प्रस्ताव संख्या-7 में नई रांजाबुरु खदान में मशीनों के बजाय अधिकतम मजदूरों से उत्खनन कराने की मांग की गई, ताकि स्थानीय बेरोजगारों को अधिक रोजगार मिल सके। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि ग्राम सभा की सहमति और स्थानीय युवाओं के नियोजन की लिखित गारंटी के बिना परियोजना आगे न बढ़े। साथ ही जिला प्रशासन की उपस्थिति में ग्रामसभा, प्रभावित गांवों के मानकी–मुंडा एवं सेल प्रबंधन के बीच 10 दिनों के भीतर त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने की मांग की गई।
जिला उपायुक्त से भेंट में 11 गांव के मुंडा में मंगल पूर्ति, सारंडा पीढ मानकी सुरेश चाम्पिया, जामदा पीढ मानकी साजन चातोम्बा, गुवासाई- ग्रामीण मुण्डा मंगल पुरती, ठाकुरा मुंडा दामू चाम्पिया, लिपुंगा मुंडा चरण चाम्पिया, समाज सेवी दारा सिंह चाम्पिया, समाज सेवी लंका पुरती, मानकी मुण्डा संघ केन्द्रीय समिति अध्यक्ष गणेश पाठ पिंगुवा, आदिवासी युवा हो महासभा के केन्द्रीय महासचिव गब्बर सिंह हेम्ब्रम उपस्थित थे।
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