प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। एक ओर राज्य सरकार लॉकडाउन (State government lockdown) के दौरान ग्रामीण मजदूरों को राहत देने के उद्देश्य से पंचायतों को निर्देश देकर मनरेगा की योजनाओं को चालू करवाया और एकाएक इस योजना की राशि को रोक देना क्या सरकार का उचित कदम है? जी हां बीते मार्च महीने की अंतिम सप्ताह से लेकर अबतक इस योजना की राशि भुगतान पर रोक लगा दिया गया है।
यूं तो पूरे प्रदेश में यह स्थिति ग्रामीण मजदूरों के लिए भयावह व दयनीय बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर पेटरवार प्रखंड (Petarvar block) के हद में अंगवाली उत्तरी एवं दक्षिणी पंचायत में दर्जनों कूप निर्माण की कार्य राशि के बिना अधूरी पड़ी है। अंगवाली उत्तरी पंचायत में सुनीता देवी, भूषण महली एवं दक्षिणी पंचायत में बेहरगोड़ा के बिसुन रजवार, बारकेंदुआ के गणेश मांझी, सोनामुनि, मुनिया देवी, डुमरियाटांड के जीतलाल मांझी, बैजनाथ मांझी, मधुपुर के सुनील गोप आदि के कुप निर्माण बीच अधर में हीं लटका हुआ है। जबकि कर्माचौकी के भीम मांझी, मोहन मांझी, रामसिंगबेरा के महादेव सोरेन का डोभा निर्माण पैसे के अभाव में रुका हुआ है। प्रखंड के चलकरी, चांदो, पिछरी आदि पंचायतों का भी यही हाल हैं। बता दें कि इन योजनाओं के एकाएक रुकने से सैंकड़ो मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उतपन्न हो गई है।
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