एस. पी. सक्सेना/बोकारो। केंद्र सरकार के वित्तीय वर्ष 2023-24 के आम बजट के विरोध में 25 फरवरी को बोकारो जिला के हद में कथारा मोड़ में अल्पसंख्यकों ने बजट की प्रति जलाकर विरोध प्रकट किया। इस अवसर पर सभा का आयोजन कर अल्पसंख्यको द्वारा बजट की प्रतियाँ जलायी गयी। नेतृत्व ऑल इंडिया तंजीम-ए-इंसाफ झारखंड राज्य कमेटी कर रही थी।
इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए तंजीम-ए-इंसाफ के राष्ट्रीय सचिव इफ़्तेख़ार महमूद ने कहा कि केंद्र की दोहरी नीति के कारण आज अल्पसंख्यक दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान मोदी सरकार एक तो महंगाई पर काबू पाने में पूरी तरह विफल रही है, दूसरी ओर देश में दिनों दिन बेरोजगारी की समस्या विकराल होती जा रही है।
इससे निपटने के बजाय केंद्र सरकार (Central Government) देश की आम आवाम को जाति धर्म में बांट कर देश का बंटाधार करने में लगी है। उन्होंने आम बजट को धोखा करार देते हुए कहा कि पूर्व में जहां मदरसों के लिए एक सौ साठ करोड़ के बजट का प्रावधान था उसे घटाकर 10 करोड़ कर दिया गया है। वहीं प्री-मैट्रिक तथा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में 1425 करोड़ के बजट को बढ़ाने के बजाय घटाकर 433 करोड़ कर दिया गया है।
महमूद ने कहा कि देश के 90 अल्पसंख्यक बहुल जिलों में पीएमजीवीके योजना मद का 1650 करोड़ की जगह पर 600 करोड़ कर दिया गया है। वहीं नई मंजिल एवं उड़ान योजना की 332 करोड़ की बजट को घटाकर 3.4 करोड़ कर दिया गया। इसी प्रकार कई योजनाओं में भी केंद्र सरकार की भेदभाव के खिलाफ तंजिम-ए-इंसाफ सड़क पर आंदोलन करने को मजबूर है।
राजद प्रदेश सचिव अरुण यादव ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार देश को जाति-धर्म, मंदिर-मस्जिद के नाम पर बांट कर राज करने में लगी है। उन्होंने कहा कि अब पानी सर से उपर चला गया है। वर्ष 2024 में होने वाले आम चुनाव में जनता ऐसी ताकतों को सत्ता से उखाड़ फेकेगी। माकपा नेता निजाम अंसारी ने कहा कि आम बजट देश की जनता के साथ धोखा के अलावा कुछ नहीं है।
संचालन कर रहे तंजिम-ए-इंसाफ के शाने रजा ने कहा कि केंद्र सरकार को यह समझना होगा कि केवल मुस्लिम वर्ग ही नहीं बल्कि जैन, बौद्ध, पारसी, सिख, ईसाई भी देश के अल्पसंख्यक हैं। जिनकी अनदेखी केंद्र सरकार को भारी पड़ेगी। इसलिए अभी भी समय है सरकार चेत जाये और अल्पसंख्यकों की अनदेखी करना बंद करें।
मौके पर उपरोक्त के अलावा नरेश यादव, अनवर रफीक, खुर्शीद आलम, राजू परवेज, जीतू सिंह, गांधी, मनीरूद्दीन, असमुद्दीन, नजरुल हक, शमशुल हक, कमालुद्दीन, वकील अहमद, गुलजार अंसारी, मंजूर अंसारी, बबलू यादव, सबीना परवीन, मुनेजा खातून, रशीदा खातून, आदि।
अनीशा बेगम, कौशरी खातून, रेशमा खातून, रबीना खातून आदि सैकड़ों की संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय समर्थक उपस्थित थे।
इस अवसर पर सभा के बाद उपस्थित जनों ने विरोध स्वरूप सामूहिक रूप से केंद्र सरकार की बजट की प्रति को जलाया।
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