मुश्ताक खान/मुंबई। स्क्रिप्ट राइटर आनंद बक्शी द्वारा लिखित फिल्म राजा और रंक का वो गीत आज भी लोग सुनने को बेताब रहते हैं। 1968 में रिलीज हुई फिल्म राजा और रंक का गीत तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है ओ “मां” गीत मुझे अक्सर भावुक कर देता है। मां पर कही गई कोई भी कविता या यूं कहे कि कोई भी पंक्तियां आपको भी झकझोर देंगे। “वो होते हैं किस्मत वाले जिनकी माताएं उनके साथ हैं।
कुछ इसी तर्ज पर डॉ. शैलेश दत्त सिंह को भी देखा गया। डॉ. शैलेश दत्त सिंह ने अपनी स्वर्गवासी माता जी श्रीमती शशी रुद्र दत्त सिंह की पारिवारिक आशीष-गीत की रचनाओं और उनकी उमड़ती भावनाओं को एक पुस्तक के रूप में न केवल पिरोया है बल्कि उसका प्रकाशन करवाया दिया है। “वो होते हैं किस्मत वाले जिनकी मां होती है” पुस्तक का विमोचन महाराष्ट्र के वन मंत्री माननीय सुधीर मुनगंटीवार ने मंत्रालय स्थित अपने बंगले पर किया।
इस अवसर पर इनके साथ डॉ. शैलेश दत्त सिंह के अलावा अन्य गणमान्य भी मौजूद थे। डॉ. शैलेश दत्त सिंह घाटकोपर पूर्व में रहते हैं और मूल रूप से जौनपुर केराकत, चंदवक भैंसा गांव के रहने वाले हैं। अपने समय के सम्माननीय और गौरवपूर्ण जीवन व्यतीत करने वाले स्व. बाबू रुद्र दत्त सिंह (वकील साहब) के सबसे छोटे पुत्र हैं। वर्तमान में आयल एन्ड गैस सेक्टर में डॉ. के रूप में अफ्रीका में कार्यरत हैं।
कोविड काल में जब देश को डॉक्टर्स की आवश्यकता महसूस हुई तो इन्होंने पूरी तन्मयता के साथ सेवा की। इनकी सेवाओं को देखते हुए तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राजभवन में डॉ. शैलेश दत्त सिंह को सम्मानित किया था।
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