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रक्त की बूंद से तलाशे जा रहें माइक्रो फाइलेरिया परजीवी, सारण जिला में नाइट ब्लड सर्वे

प्रत्येक प्रखंड में बनाया गया है दो साइट, प्रत्येक साइट पर 300 ब्लड सैंपल कलेक्शन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। बिहार के सारण जिला में फाइलेरिया जैसी गंभीर और दीर्घकालिक बीमारी को जड़ से खत्म करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण पहल शुरु की है। जिले में नाइट ब्लड सर्वे की शुरुआत की गई है, जिसके तहत रात के समय रहिवासियों के रक्त का नमूना लेकर माइक्रो फाइलेरिया परजीवी की जांच की जा रही है।

जानकारी के अनुसार जिले के प्रत्येक प्रखंडो में यह सर्वे बीते 15 दिसंबर से शुरु किया गया तथा आगामी 20 दिसंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य जिले में फाइलेरिया की वास्तविक स्थिति (एंडेमिसिटी) का आकलन कर भविष्य की रोकथाम एवं दवा वितरण रणनीति को और अधिक प्रभावी बनाना है।

बताया जाता है कि नाइट ब्लड सर्वे के अंतर्गत प्रत्येक प्रखंड में दो-दो सर्वे साइट स्थापित की गई हैं, जिनमें एक स्थायी और एक अस्थायी स्थल शामिल है। इन सभी स्थलों पर रात 8 बजे के बाद 20 वर्ष या उससे अधिक आयु के रहिवासियों का रक्त नमूना लिया जा रहा है। प्रत्येक साइट से लगभग 300 रहिवासियों के ब्लड सैंपल एकत्र किए जाएंगे। यह जांच विशेष रूप से रात में इसलिए की जाती है, क्योंकि माइक्रो फाइलेरिया परजीवी रात के समय रक्त में सक्रिय रूप से पाया जाता है।

विधायक और जनप्रतिनिधियों का भी लिया गया ब्लड सैंपल

बताया जाता है कि उक्त अभियान की शुरुआत प्रखंड स्तर पर स्थानीय विधायक, मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में की गई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने स्वयं भी अपना ब्लड सैंपल देकर आम जनों को आगे आने और जांच में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। सारण जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार सिंह ने 16 दिसंबर को बताया कि यह अभियान 15 से 20 दिसंबर तक चलेगा। सर्वे का कार्य प्रतिदिन रात 8 बजे से शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक चयनित स्थल पर पांच सदस्यीय टीम तैनात की गई है, जिसमें एक लैब टेक्नीशियन (एलटी), एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ), एक एएनएम, एक आशा कार्यकर्ता एवं एक अन्य सहयोगी कर्मी शामिल हैं। सभी टीमें मानक प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित तरीके से रक्त नमूने एकत्र कर जांच की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं।

ज्ञात हो कि इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए विशेष पर्यवेक्षण टीम भी गठित की गई है। नाइट ब्लड सर्वे में सहयोगी संस्थाओं पीरामल और सीफार द्वारा तकनीकी एवं सामुदायिक स्तर पर सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिससे अभियान को मजबूती मिल रही है। जागरूकता में जुटे पेशेंट, स्टेक होल्डर, प्लेटफॉर्म के सदस्य नाइट ब्लड सर्वे को सफल बनाने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर गठित पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के सदस्य भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ये सदस्य घर-घर जाकर आम रहिवासियों को नाइट ब्लड सर्वे के महत्व के बारे में जानकारी दे रहे हैं और जांच में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इसके साथ ही विद्यालयों में बच्चों के माध्यम से भी फाइलेरिया के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है, ताकि संदेश पूरे समुदाय तक पहुंचे। इसके तहत सारण जिला के हद में रिविलगंज और दिघवारा प्रखंड में कुल 12 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर पीएसपी का गठन किया गया है, जो इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नाइट ब्लड सर्वे से जिले में फाइलेरिया के वास्तविक प्रसार की पहचान होगी और इसके आधार पर आने वाले समय में सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) एवं अन्य रोकथाम उपायों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा। आम जनों से अपील की गई है कि वे आगे आकर जांच में सहयोग करें, ताकि फाइलेरिया मुक्त सारण का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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