एस. पी. सक्सेना/बोकारो। आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) के तत्त्वाधान में 13 सितंबर को बोकारो जोनल हेड आनंद टुडू के नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व आदिवासी अधिकार घोषणा पत्र जारी किया है। उसे लेकर बेरमो बीडीओ को ज्ञापन सौंपा गया।
जानकारी के अनुसार आदिवासी सेंगेल अभियान के द्वारा सेंगेल के सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल आदिवासी अधिकार घोषणा पत्र लागू करने कराने हेतु बेरमो के प्रखंड विकास पदाधिकारी मधु कुमारी के मार्फत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम 5 प्रमुख मांगों की मान्यता संबंधी ज्ञापन पत्र सुपुर्द किया गया।
जिसमें आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रूल सिस्टम (TSRS) में सुधार लाने के लिए अविलंब जनतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों और व्यवहार का समावेश करने, भारत के प्रकृति पूजक आदिवासियों के सरना धर्म कोड को अविलंब मान्यता देकर जनगणना में शामिल करने, आदि।
भारत की एकमात्र संवैधानिक मान्यता प्राप्त (आठवीं अनुसूची में शामिल) बड़ी आदिवासी भाषा यथा संताली भाषा को अविलंब झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा देने, असम और अंडमान में शताब्दियों से बसे झारखंडी आदिवासियों को अविलंब अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने तथा भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन 15 नवंबर 2000 को स्थापित झारखंड प्रदेश (दिशोम) मूलतः आदिवासी प्रदेश है।
इसको लुटने- मिटने से बचाने के लिए सभी संवैधानिक, कानूनी प्रावधानों को सकारात्मक रूप से सक्रिय करने की मांग शामिल है। साथ हीं बिरसा मुंडा और सिदो मुर्मू का सपना आबोआग दिशोम आबोआग राज को स्थापित करने की मांग की गयी है।
ज्ञापन पत्र सौंपने वाले प्रतिनिधि मंडल में सेंगेल के प्रतिनिधि बोकारो जोनल हेड आनन्द टुडू, बेरमो प्रखंड सेंगेल परगना माहा किस्कु, बेरमो प्रखंड सेंगेल टावर अनिल बास्के, सेंगेल छात्र मोर्च अध्यक्ष आनन्द सोरेन, उमेश मुर्मू, सुरिन्दर प्रसाद सोरेन, कमाल टुडू आदि शामिल थे।
232 total views, 1 views today