अवध किशोर शर्मा/सोनपुर (सारण)। हरिहरनाथ मुक्तिनाथ सह बिहार सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा की कालीघाट सोनपुर में 5 मई को समागम किया गया।
इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन मंत्री व धर्म महासभा के मुख्य अतिथि डॉ बालमुकुंद पांडेय ने इस अवसर पर कहा कि किसी भी देश कि प्रगति उस देश के सांस्कृतिक विरासत के पतन के मूल्य पर नही होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में जो अभी तक इतिहास लिखा गया है, उसमें देश के सांस्कृतिक परम्पराओं और मूल्यों के साथ न्याय नही किया गया। यह यात्रा बिहार के प्रमुख मंदिरों से निकाली गयी है जो सांस्कृतिक जागरूकता के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि भारत को जानना है तो मंदिरों को जानना आवश्यक है, जिसने मंदिरों को नही जाना, वह भारत को नही जान सकता।
हरिहरनाथ मुक्तिनाथ सह बिहार सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा की कालीघाट सोनपुर में आयोजित महती धर्म सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार के अलग-अलग 12 प्रमुख मंदिरों से यह यात्रा निकाली गयी है, जिनका आज हरिहरक्षेत्र में समागम हुआ है।
अब यह यात्रा सम्मिलित रुप से 6 मई को प्रातः मुक्तिनाथ नेपाल के लिए प्रस्थान करेगी। धर्म जागरण समन्वय के क्षेत्र प्रमुख एवं इस यात्रा के प्रेरक सुबेदार सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सम्पूर्ण बिहार में धर्मांतरण, घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है।
ईसाई मिशनरियों द्वारा गरीब, दलित एवं भोले-भाले आदिवासियों को बरग़लाकर धर्मान्तरित कराया जा रहा है। उनके जड़ों से दूर किया जा रहा है। यह एक सांस्कृतिक हमला है, जिसकी गंभीरता को राज्य सरकार नही समझ रही है। इस यात्रा के जरिये इन्ही मुद्दों पर जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मै बिहार सरकार से मांग करता हुँ कि उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा आदि के तर्ज पर बिहार में भी धर्मांतरण विरोधी कानून लाया जाए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप ने कहा कि यह यात्रा सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक नया दौर ला रहा है। संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता इतिहास के प्रति जागरूक बनाता है। जो इतिहास याद रखते हैं, वही इतिहास बनाते हैं।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए पूर्व सांसद गोपाल नारायण सिंह ने कहा कि बिहार का पुरा सीमांचल आज मिनी पाकिस्तान बन चुका है। वहाँ के मूल निवासी पलायन करने के लिए मजबूर हैं। वहाँ जनसंख्यकीय संरचना पूरी तरह बदल चुकी है, जो बिहार के लिए अच्छा संकेत नही है। उन्होंने कहा कि वोट बैंक के नाम पर बिहार के भविष्य के साथ खिलवाड़ नही करना चाहिए।
धर्मसभा में रामानुजाचार्य स्वामी रंगनाथाचार्य, महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेव दास, विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल सदस्य दयानन्द मुनी, पूनानंद महाराज, महंथ रितेश दास, संत सिद्धेश्वर भारती, महंथ धर्मदास, संत मत के वरिष्ठ आचार्य स्वामी सत्यप्रकाश महाराज, संत रामाशंकर शास्त्री, विष्णुदास उदासीन(मौनी बाबा), बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य अर्चक सुशील चन्द्र शास्त्री ने एक मत से कहा कि यह सांस्कृतिक यात्रा सभ्यता-संस्कृति को अक्षुण रखने हेतु महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का संचालन भाजपा युवा मोर्चा के सारण जिला प्रभारी सह कार्यक्रम प्रभारी आशुतोष कुमार ने किया। धर्म सभा के पश्चात ग्रामीणों द्वारा दीपोत्सव किया गया, जिसके बाद वाराणसी के अर्चकों द्वारा नारायणी महाआरती का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री सांसद राजीव प्रताप रूढ़ी, प्रसिद्ध लेखक और चिंतक सह यात्रा संयोजक मिथिलेश सिंह, प्रांत संयोजक अवधेश यादव, विधान पार्षद प्रोफेसर डॉ राजेन्द्र गुप्ता, यात्रा समिति के महामंत्री बिनोद सम्राट, आदि।
राजेश कुमार सिंह, यात्रा समिति के उपाध्यक्ष सत्येन्द्र सिंह, अभिषेक श्रीवास्तव, विद्यार्थी परिषद के यशवंत कुमार, हिन्दु जागरण मंच के प्रदेश संयोजक विनोद यादव, संजय कुमार सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
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