प्रहरी संवाददाता/जैनामोड़ (बोकारो)। एक मई मजदूरों और श्रमिकों को सम्मान देने के उद्देश्य से हर साल दुनिया भर में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता है। मजदूरों के नाम समर्पित यह दिन एक मई है।
मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाते हैं, जिससे मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो सके।
इस दिवस को पहली बार 1889 में मनाने का फैसला लिया गया। जिसकी रूपरेखा अमेरिका के शिकागो शहर से बनने लगी थी, जब मजदूर एक होकर सड़क पर उतर आए थे। उक्त बातें एक मई को दीदीजी फाउंडेशन के संस्थापक डॉ नम्रता आनंद ने कही।
उन्होंने कहा कि एक मई 1889 को ही अमेरिका में श्रमिक दिवस मनाने का प्रस्ताव लागू हो गया, लेकिन भारत में इस दिन को मनाने की शुरुआत करीब 34 साल बाद हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान भारत देश में भी मजदूर अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं जाने के बाद 1 मई 1923 में चेन्नई में पहली बार श्रमिक दिवस मनाया गया था।
इस वर्ष मजदूर दिवस 2023 की थीम सकारात्मक सुरक्षा और हेल्थ कल्चर के निर्माण के लिए मिलकर कार्य करना। एक मई विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त अवकाश है, जो श्रमिक आंदोलन की उपलब्धियों को स्वीकार करता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस भारत, क्यूबा और चीन सहित 80 से अधिक देशों में मनाया जाता है।
दुनिया के विभिन्न भागों में इस दिन श्रमिकों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उन्हें शोषण से बचाने के लिए रैली निकाली जाती है। उन्होंने बताया कि लेबर डे एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो समाज में श्रमिकों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करता है और उन्हें सम्मानित करता है। यह दिन काम के महत्व को समझने के साथ-साथ उचित श्रम प्रथाओं और श्रमिकों के अधिकारों के महत्व को भी समझाता है।
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