श्रीरामचरित मानस महायज्ञ में आकर्षक झांकी की प्रस्तुति
प्रहरी संवाददाता/पेटरवार(बोकारो)। पेटरवार प्रखंड (Petarvar block) के हद में बीते 2 अप्रैल से अंगवाली स्थित धर्म-संस्थान मैथानटुंगरी में आयोजित श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के तीसरे दिवस 4 अप्रैल की रात आगंतुक आचार्यों द्वारा श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग पर ब्याख्यान दिया गया। इस दौरान भगवान शिव के त्रिशूल पर बसा पावन तीर्थ-नगरी वाराणसी (Varanasi) से पधारे मानस मर्मज्ञ अच्युतानन्द पाठक ने कहा कि आज समाज में हो रहे ‘बे-मेल’ विवाह जीवन भर के लिये कष्टदायक साबित हो रहे हैं।
उन्होंने मानस के श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम एवं भगवती सीता एक दूसरे को पुष्प-वाटिका में लता की ओट में देखा, परखा व पूर्ण वास्तविकता से परिचित हुए। उनकी विवाह में वर, वधु पक्ष एवं गुरुजनों की पूर्ण सहमति प्राप्त थी। मानस मर्मज्ञ ने स्पष्ट किया कि आज के परिवेश में युवक, युवती एक दूसरे को पसंद कर निजी सहमति से विवाह तो रचा लेते हैं पर परिवार के सदस्यों से यह रहस्य छिपाये रखते हैं जो भविष्य में उन्हें घोर संकट में डाल देता है। ऐसे विरले ही हैं जो माँ-बाप से दूर रहकर जीवन यापन करने में सफल हो पाते हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम एवं सूर्पनखा संवाद की चर्चा करते हुए कहा कि सूर्पनखा ने अपने प्रतापी भाई रावण को बिना बताये श्रीराम से विवाह का प्रस्ताव रखा इसलिए उसकी नाक कटने का वह स्वंय दोषी है।
आगे उन्होंने आज के नौजवानों व नवयुवतियों को यह संदेश भी दिया कि मानस के इस प्रसंग से सीख अवश्य लें, ताकि जीवन मे कभी धोखा न खाएं। विवाह और वियाह के अंतर को बताते हूये कहा कि दहेज रूपी दानव या अन्य सामाजिक तौर पर दोनों पक्ष के लोग आहत न हों तो विवाह कहलाता है। किसी प्रकार का हृदय में ठेस पहुंचे तो वह वियाह कहलाता है। यानि आह लग जाता है।
यूपी के ही चित्रकूट धाम से पधारी मानस माधुरी राजकुमारी ने विवाह प्रसंग पर अपने ब्याख्यान मे कहा कि भगवती सीता शांति की प्रतीक है। इसे परमसत्ता श्रीराम ने अपनाया तो उसने कुल का उद्धार किया। आज की युवतियां माता, पिता की उपेक्षा कर मनमानी कर विवाह रचाती हैं तो जीवन भर दुख झेलने को विवश होती हैं। मानस माधुरी ने नवयुवतियों को पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध से बचने की सलाह दी। व्यास अनिल पाठक एवं उनके सहयोगियों ने मैथली भाषा में राम-सीता विवाह पर अनेको संगीतमय सोहर गान की प्रस्तुति की। शिक्षक संजय मिश्रा के सानिध्य में राम-सीता विवाह एवं परसुराम संवाद पर आकर्षक झांकी प्रस्तुत किया गया।
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