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आर पार की लड़ाई में मजदूरों की जीत, मनोज को मिला न्याय-राजेंद्र सिंह

प्रहरी संवाददाता/बोकारो। विगत 7 मार्च को स्व मनोज सागर जो सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र के कोक-ओवन बैट्री नंबर 1 एवं 2 में मेसर्स एसएसईसीपीएल मे कार्यरत थे, जिनका कार्यस्थल पर दुर्घटनाग्रस्त होने से मृत्यु हो गई थी। काफी लम्बी लड़ाई के बाद आखिरकार मृतक को न्याय मिला। मृतक मनोज क्रान्तिकारी इस्पात मजदूर संघ (एचएमएस) के सक्रीय सदस्य थे।

स्व. मनोज के मृत्यु के पश्चात नियोजन एवं मुआवजा पर प्रबंधन के नकारात्मक रवैये से आक्रोशित मजदूरो ने संघ के महामन्त्री सह-सदस्य एनजेसीएस राजेंद्र सिंह के नेतृत्व मे बीते 8 मई की दोपहर 2 बजे से पूरे कोक-ओवन का चक्का जाम कर दिया। चक्का जाम के दौरान अधिशासी निदेशक संकार्य के नेतृत्व मे प्रबंधन और युनियन के बीच वार्ता में अधिशासी निदेशक संकार्य ने युनियन पदाधिकारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हमारी संवेदना मृतक के परिजनो के साथ है।

वार्ता मे सिंह ने कहा कि आज प्लांट के उत्पादन मे ठेका मजदूरो की मुख्य भुमिका है, इसलिये ठेका मजदूर की मृत्यु होने पर चाहे बीमारी से हो या दुर्घटना से, नियमित कामगार के समान ही मुआवजा और नियोजन का प्रावधान करे। प्रबंधन ने युनियन की मांग पर सहमति जताते हुए कहा कि इस मांग पर आप हमे पत्र दें, हम सकारात्मक हैं।

प्रबंधन के आश्वासन के बाद युनियन ने संध्या 6 हड़ताल वापस लिया। दूसरे दिन 9 मई को प्रातः 11 बजे युनियन ने प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा। मुख्य महाप्रबंधक मानव संसाधन तथा महाप्रबंधक औद्योगिक संबंध के साथ युनियन पदाधिकारियौन की संपन्न बैठक मे युनियन के मांग पत्र के आधार पर नियोजन पर सहमति बनी और मृतक के आश्रित को नियोजन पत्र सौंपा गया।

उक्त पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए यूनियन महामंत्री सिंह ने कहा कि यह जीत मजदूरो की एकता की जीत है। उन्होंने कहा कि हमने प्रबंधन को वार्ता मे साफ कह दिया था कि ठेका मजदूरो पर भी वही नियम लागू हो जो नियमित कामगारो के लिये लागू है। कहा कि हमने प्रबंधन को इस बावत पत्र लिख दिया है, जिसके आधार पर नियोजन दिया गया है। नियम के उपरांत ना सिर्फ कार्यस्थल पर अपितु प्लांट में आने जाने के क्रम मे क्रमशः एक घंटा पहले और बाद भी मृत्यु होने पर कार्य दुर्घटना माना जायेगा और 12 घंटे के भीतर मृतक के आश्रित को नियोजन और मुआवजा दिया जायेगा।

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