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माली कल्याण समिति फुसरो ने धूमधाम से मनाई सावित्री बाई फुले की जयंती

सावित्री बाई फुले ने दी महिला सशक्तीकरण और नारी शक्ति को बढावा दी-रूपा सिंहा

एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। देश में नारी शिक्षा की अग्रदूत व भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती समारोह का 3 जनवरी को बोकारो जिला के हद में फुसरो स्थित फूल मंडी मे आयोजन की गई।

इस अवसर पर सर्वप्रथम उपस्थित जनों ने सावित्री बाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सीसीएल ढ़ोरी क्षेत्र के महाप्रबंधक रंजय सिंहा की पत्नी रूपा सिंहा और महाप्रबंधक सह विभागाध्यक्ष ईएंडएम गौतम मोहंती की पत्नी पूजा मोहंती ने कार्यक्रम में पहुंचकर सावित्री बाई फुले के जीवन पर प्रकाश डाला।

महिला द्वय ने इस अवसर पर कहा कि माता सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षक, कवियत्री व समाजसेविका थी, जिनका लक्ष्य बालिकाओं को शिक्षित करना रहा। कहा कि सावित्री बाई फुले का जन्म तीन जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के एक सैनी परिवार में हुआ था। मात्र नौ साल की आयु में उनकी शादी क्रांतिकारी महात्मा ज्योतिबा फुले से हुई थी। उस वक्त ज्योतिबा फुले मात्र 13 साल के थे।

माता सावित्री बाई फुले को बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। कहा कि 18 वीं सदी की बात करें तो उस समय महिलाओं का स्कूल जाना भी पाप समझा जाता था। ऐसे समय में सावित्री बाई फुले ने जो कर दिखाया, वह कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 1848 में बालिकाओं के लिए प्रथम विद्यालय की स्थापना की।

बेरमो के पूर्व विधायक योगेश्वर महतो बाटुल, भाजपा बोकारो जिला उपाध्यक्ष अर्चना सिंह, मजदूर नेता श्यामल कुमार सरकार और रविंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि माता सावित्री बाई फुले एवं उनके पति ज्योतिबा फूले ने मिलकर 1 जनवरी 1848 को महिलाओं के लिए पहला स्कूल खोला। इन्हें समाज सुधारक के नाम से जाना जाता है। उन्होंने महिला सशक्तीकरण और नारी शक्ति को बढावा दिए। कहा कि उस समय समाज में प्रथा था कि महिलाओ को नहीं पढना है।

लेकिन उस समाज के रूढिवादी प्रथा को तोड़ते हुए ज्योतिबा फूले ने अपनी पत्नी को आधी रात को पढाते थे, ताकि कोर्ड रूढिवादी मानसिकता वाले ना देख ले। यदि पढते या पढाते देख लिए गए तो सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता था। इन संघषों के बावजूद भी बच्चों को पढाते रहे। कार्यक्रम में माली कल्याण समिति फुसरो ने सरकार से सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न देने की भी मांग की। कार्यक्रम मे आये अतिथियों का स्वागत युवा व्यवसाई संघ फुसरो के सचिव बैजू मालाकार और कोषाध्यक्ष राकेश मालाकार ने किया। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित की गई। कार्यक्रम का संचालन गुड्डू वरणवाल ने किया।

मौके पर बेरमो विधायक प्रतिनिधि उत्तम सिंह, जिप सदस्य नीतू सिंह, पूर्व नप उपाध्यक्ष छेदी नोनिया, झामुमो नेता अनिल अग्रवाल, चंद्रपुरा प्रखंड पूर्व प्रमुख अनिता गुप्ता, कृष्ण कुमार, मंजूर हुसैन उर्फ जिया, अनिल गुप्ता, संत सिंह, महेंद्र चौधरी, भरत वर्मा, दीपक महतो, सहोदरी देवी आदि दर्जनों गणमान्य मौजूद रहे।

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