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माले ने किसान विरोधी काला कानून का जुलूस निकालकर पूतला फूंका

किसानी हेतु बिजली सब्सिडी बंद न करे सरकार-सुरेन्द्र प्रसाद सिंह

एस.पी.सक्सेना/समस्तीपुर(बिहार)। केंद्र के किसान विरोधी तीनों काला कानून, बिजली बिल 2020 को वापस लेकर दिल्ली में जारी किसान आंदोलन के समर्थन में 2 दिसंबर को समस्तीपुर जिला (Samastipur district) के हद में ताजपुर बाजार क्षेत्र के गांधी चौक (Gandhi chowk) पर अखिल भारतीय किसान महासभा एवं भाकपा माले ने संयुक्त रूप से जुलूसमाले ने किसान विरोधी काला कानून का जुलूस निकालकर उक्त कानून का पूतला फूंका।
मोतीपुर खैनी गोदाम से नारे लिखे तख्तियां, झंडे, बैनर लेकर संगठन द्वय के कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला। जुलूस मुख्य मार्गों से नारा लगाते हुए भ्रमण कर गांधी चौक पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा कीअध्यक्षता किसान नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह ने किया। मौके पर राजदेव प्रसाद सिंह, बासुदेव राय, शंकर सिंह, संजीव राय, मुंशीलाल राय, मो० जावेद, रवींद्र प्रसाद सिंह, ललन दास, कैलाश सिंह, अर्जुन शर्मा, कुशेश्वर शर्मा, उपेंद्र शर्मा, देवन सहनी, सुखदेव सिंह, जीतन शर्मा, मो० गुलाब, विष्णुदेव कुमार, मुकेश मेहता, मो० नसीम, ऐपवा जिलाध्यक्ष सह माले नेत्री बंदना सिंह समेत अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया।
बतौर मुख्य वक्ता सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा कि रेल, जहाज, बैंक, एलआईसी, एचपीसीएल, बीएसएनएल, लालकीला आदि कॉरपोरेट कंपनीयों को सौंपने के बाद मोदी सरकार कृषि एवं कृषि उत्पादों को अडानी- अंबानी को सौंपना चाहती है। सरकार स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने से कतरा रही है। किसानों को कॉरपोरेट और विचौलिया के चंगुल में फंसाया जा रहा है। इसे देश के किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने दिल्ली में किसान आंदोलन पर सरकार के इशारे पर की गई पुलिसिया दमन की निंदा करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जो सरकार किसानों से टकराई है वह सरकार जमिंदोज हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर उक्त काला कानून वापस नहीं लिया गया तो मोदी सरकार को भी किसान सत्ता से उखाड़ फेकेंगे।

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