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गंगदा में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया मागे पर्व

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में गंगदा पंचायत के गंगदा में आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व मागे परब 2 मार्च को पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया गया।

मागे परब के अवसर पर गांव के दिउरी जरिया सुरीन ने लाल एवं काले मुर्गे की विधिवत पूजा-अर्चना कर बलि दी। इस दौरान ग्राम देवता सिंहबांगा और मनबांगा को स्मरण करते हुए गांव की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई। परब के दौरान विभिन्न देवी-देवताओं की पारंपरिक विधि से पूजा की गई। ग्रामीणों ने अच्छी फसल, खुशहाली और आपसी एकता के लिए प्रार्थना की।

पूजा के बाद पूरे गांव में उत्सव का माहौल बन गया। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर पारंपरिक नृत्य किया। पुरुषों ने बांसुरी बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो उठा। इस अवसर पर महिलाओं और पुरुषों ने पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा धारण कर सांस्कृतिक एकता और परंपरा का प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक आभूषणों से सजे ग्रामीणों ने सामूहिक नृत्य कर पर्व को यादगार बना दिया।

जानकारी के अनुसार आयोजित मागे परब में पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा सहित गुवा, रोवाम, घाटकुड़ी तथा मनोहरपुर समेत आसपास के क्षेत्रों से ग्रामीणों ने भाग लेकर पर्व की शोभा बढ़ाई। मौके पर दिउरी के सहयोगी रोया तुमुइ, सीरम सुरीन, बिरसा सुरीन सहित अनेक ग्रामीण रहिवासी उपस्थित थे। पूरे आयोजन के दौरान गांव में आपसी भाईचारा और पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली।

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