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एशिया का सबसे बड़ा बैल बाजार का लोअर बैलहट्टा ले रहा आखिरी सांस

सरकारी शुल्क मुक्त पर घट रही हर साल बैलों की आमद

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में लगने वाला विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला का लोअर बैलहट्टा सरकारी शुल्क मुक्त किया जा चुका है। बावजूद इसके हर साल बैलों की आमद में गिरावट होती जा रही है।

कभी यहां का बैल बाजार बिहार भर के किसानों के लिए बैलों के खरीद -बिक्री का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। इस बार अभी तक लोअर बैलहट्टा में कहीं भी साफ -सफाई शुरू नहीं की जा सकी है। बैलहट्टा में जाने के लिए एक मात्र मार्ग है जो आज तक की स्थिति में क्षतिग्रस्त है।

बताया जाता है कि यहां का घुड़ दौड़ मंच तक ले जानेवाली ईंट सोलिंग सड़क जंगलों से पटा परा है।निकट ही आज प्रसाधन संबंधी कार्य किया जा रहा था, परन्तु निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि अभी तक लोअर बैलहट्टा पर सरकार का ध्यान नहीं गया है। किसानों का मानना है कि बैलों की आमद में गिरावट के अनेक कारण हो सकते हैं, पर इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि यह क्षेत्र जब से शुल्क मुक्त किया गया है तबसे इसकी सरकारी स्तर पर उपेक्षा भी होती रही है। यह और दीगर है कि बैल व्यवसायियों को इस बार हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला लोअर बैलहट्टा में पशुओं के लिए पानी की किल्लत नहीं होगी।

उन्हें पशु मेला के इतिहास में पहली बार प्रकृति द्वारा प्रदत भरपूर पानी मिलेगा।अभी मही नदी में लबालब पानी भरा है। सारण जिला प्रशासन को मुख्य सड़क से बैल बाजार में बैलों को ले जाने के लिए कई स्थानों पर मिट्टी भरकर सड़कों का निर्माण करना पड़ेगा। क्योंकि, सड़क किनारे अभी भी मही नदी के बाढ़ के पानी का जल जमाव है। कहीं पानी सुख चुका है, जहां से सड़कें निकाली जा सकती हैं।

लालू प्रसाद यादव ने किया था सरकारी बैल बाजार को शुल्क मुक्त

सोनपुर मेला वर्ष 1995 के 6 नवंबर को उ‌द्घाटन समारोह के अवसर पर मेला के मुख्य जन सम्पर्क पंडाल के मंच पर तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने पशुओं की खरीद-बिक्री शुल्क मुक्त कर दिया था। यह आदेश उसी वर्ष से लागू हो गया। तब लोअर बैलहट्टा की बंदोबस्ती रद्द कर जमा की गई राशि ठेकेदारों को वापस करनी पड़ी थी। तब से लोअर बैलहट्टा में पशुओं के खरीद -बिक्री को शुल्क से मुक्त कर दिया गया था।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधारित कृषि ने परम्परागत खेती के तौर तरीकों को प्रभावित किया है। ट्रैक्टर से खेतों की जुताई होने से मेले मे बैलों की आमद कम होती चली गई। किसानों के दरवाजे से बैल गायब होते चले गए। अब इस बैल बाजार में बैलों की आमद बहुत कम हो चुकी है। विदित हो कि सोनपुर मेला का बैल बाजार दो भागों में विभक्त है। सरकारी लोअर बैलहट्टा और अपर बैलहट्टा। अपर बैलहट्टा सोनपुर गांव में निजी जमीनों में लगता है, जिसके संरक्षक जमीन मालिक होते हैं। जबकि लोअर बैलहट्टा पूरी तरह से सरकारी नियंत्राधीन है।

सच कहिए तो कभी यह लोअर बैलहट्टा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा सरकारी बैल बाजार हुआ करता था, जो मही नदी किनारे हरिहरनाथ -पहलेजा निचली पथ के दक्षिणी किनारे 52 बीघा में फैला है। देवोत्थान एकादशी से ही लोअर बैलहट्टा में बैलों का आगमन शुरू हो जाता है। बैल व्यापारी मेला उद्घाटन की प्रतिक्षा नहीं करते।

घुड़दौड़ और एडवेंचर स्पोर्ट्स का यहां होता है आयोजन

हरिहर क्षेत्र सोनपुर के लोअर बैलहट्टा में एडवेंचर स्पोर्ट्स के साथ – साथ हॉट एयर बैलून का शो भी आयोजित होता है। मेला यात्री इस हॉट एयर बैलून की सवारी कर गगन यान की तरह सवारी का लुत्फ उठाते हैं। यहां घुड़दौड़ का भी आयोजन होता रहा है, जिसके लिए सड़क बनाई गई थी और मंच भी बना था। इस बार भी जिला प्रशासन की घुड़दौड़ के आयोजन की घोषणा है। यहीं पर कई बार एयर एडवेंचर स्पोर्ट्स के तहत निशानेबाजी का खेल भी मेला दर्शकों ने देखा है। युवाओं ने तीरंदाजी पर भी हाथ आजमाया है। अमरनाथ मूर्ति के पास से बैलहट्टा में घुसने वाले रास्ते पर अभी पानी है। यह सबसे पुराना मार्ग है जो पूर्णतः बदहाल है। इस बार छठ पूजा में भी यहां का सड़क भरा नहीं गया है।

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