सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में सेल की गुवा खदान में सेलकर्मियों व ठेका मजदूरों का अनिश्चितकालीन स्लो डाउन आंदोलन दुसरे दिन 5 जुलाई को भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का नेतृत्व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा कर रहे हैं। यह आंदोलन चार सूत्री मांगों को लेकर किया जा रहा है। इस आंदोलन से सेल प्रबंधन को अबतक डेढ़ करोड़ का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
मजदूरों की मांगों में बीते दिनों बाहर से नियुक्त कर गुवा भेजे गये एस-3 ग्रेड के 18 सेल कर्मियों को तत्काल वापस भेजने, ठेका मजदूरों को समान कार्य का समान वेतन व सुविधाएं, सेवानिवृत्त सेलकर्मियों के आश्रितों को खदान में नौकरी एवं गुवा खदान में 500 पदों पर खदान प्रभावित सारंडा क्षेत्र के गांवों व गुवा के स्थानीय बेरोजगारों को शत-प्रतिशत नौकरी देना शामिल है।
बताया जाता है कि सेल की गुवा खदान में स्लो डाउन आंदोलन के तहत उत्पादन धीमा होने के कारण पहले दिन बीते 4 जुलाई को तीनों पालियों में कुल 5500 टन उत्पादन संभव हो पाया है। छह जुलाई को मजदूरों का हौसला बढ़ाने पूर्व मुख्यमंत्री पुनः गुवा आएंगे।
उक्त आंदोलन में शामिल मजदूर नेता रामा पांडेय ने 5 जुलाई को बताया कि आंदोलन के पहले दिन 4 जुलाई को प्रथम पाली में 1200 टन, द्वितीय पाली में 2700 टन एवं तृतीय पाली में 1600 टन यथा कुल 55 सौ टन हीं उत्पादन हो सका। जबकि तीनों पाली में कुल मिलाकर 12 हजार से 14 हजार टन उत्पादन प्रतिदिन होता है। इसके अलावे 5 जुलाई को प्रथम पाली में लगभग 1200 टन ही उत्पादन हो सका है।
इससे प्रबंधन को अब तक लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई की रात लगभग 8 बजे गुवा प्रबंधन ने आंदोलन में शामिल मजदूर संगठनों को वार्ता के लिए बुलाया था, लेकिन वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकला था।
मजदूर नेता पांडेय ने बताया कि 6 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा आंदोलन में शामिल होकर मजदूरों का हौसला बढ़ाने पुनः गुवा आयेंगे। कहा कि प्रबंधन नोटिस निकालकर आंदोलन में शामिल मजदूरों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही का भय दिखा रहा है, लेकिन यहां के तमाम मजदूर इससे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी मांगे जब तक पूरी नहीं होती हैं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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