एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के सभी पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त सम्मानितों को कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सरकार के तर्ज़ पर 5 डिसमिल भू-पट्टा और ₹ 25,000 मासिक पेंशन राशि के साथ-साथ चिकित्सा सुविधा मुहैया कराए राज्य की हेमंत सोरेन सरकार।
उपरोक्त बातें आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक द्वारा राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजे गए ईमेल पत्र के माध्यम से ध्यान आकृष्ट कराते हुए कही।
उन्होंने कहा कि झारखंड के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को समृद्ध करने वाले पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त सम्मानित गणमान्य जनों के सम्मान में व् झारखंड सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन विशिष्ट व्यक्तियों को उनके योगदान के लिए उपरोक्त सुविधा प्रदान की जाएं। विशेष रूप से वे मांग करते हैं कि प्रत्येक पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति को रहने के लिए पांच डिसमिल जमीन और जीवनयापन हेतु मासिक मानदेय राशि प्रदान की जाए।
यह कदम न केवल उन महान व्यक्तियों के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा, बल्कि भावी पीढ़ियों को भी प्रेरणा देगा कि वे समाज और देश के लिए उत्कृष्ट योगदान दें। नायक ने कहा कि पद्मश्री पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो कला, साहित्य, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, सामाजिक कार्य, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। झारखंड के कई व्यक्तियों ने इस सम्मान को प्राप्त कर राज्य का गौरव बढ़ाया है।
जिसमें मुख्य रूप से कला व् लोक संगीत क्षेत्र में मुकुंद नायक, महावीर नायक, झारखंड के पारंपरिक लोक संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाने वाले सामाजिक कार्य जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य सिमोन उरांव, सामाजिक समानता और ग्रामीण विकास के लिए रामचंद्र सिंह, सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता और आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए छुटनी महतो, शिक्षा और सामाजिक विकास में अशोक भगत, सामाजिक उत्थान और ग्रामीण विकास के लिए डॉ रतनलाल शामिल है। उपरोक्त ने अपने कार्यों से न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
नायक ने कहा कि हालांकि, इनके सम्मान में अभी तक झारखंड सरकार द्वारा कोई विशेष सुविधा, जैसे आवासीय भूमि या मानदेय राशि प्रदान करने की ठोस नीति लागू नहीं की गई है जो सभी सरकारो के लिए शर्म का विषय है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच यह भी बताना चाहता है कि कई अन्य राज्य सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त व्यक्तियों को सम्मान और सुविधाएं प्रदान की जाती है, जो झारखंड के लिए एक प्रेरणा हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने पद्म पुरस्कार विजेताओं को मासिक मानदेय और अन्य सुविधाएं प्रदान करने की नीति लागू की है। उदाहरण के लिए, पद्मश्री सम्मानित को मासिक मानदेय के साथ-साथ चिकित्सा और आवासीय सुविधाएं प्रदान की जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए मासिक पेंशन योजना शुरू की है, जिसमें ₹ 15,000 से ₹25,000 तक की मासिक राशि दी जाती है। छत्तीसगढ़ सरकार ने पद्म पुरस्कार प्राप्त को सम्मान राशि और आवासीय सुविधाएं प्रदान करने की पहल की है, जिसके तहत कुछ मामलों में भूमि आवंटन भी शामिल है।
इसी प्रकार कर्नाटक सरकार अपने पद्म पुरस्कार विजेताओं को मासिक सम्मान राशि और अन्य सुविधाएं प्रदान करती है, जो उनके योगदान को मान्यता देता है। कहा कि वे झारखंड सरकार से मांग करते हैं कि प्रत्येक पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त को उनके गृह जिले में पांच डिसमिल जमीन आवास के लिए आवंटित की जाए। उनके जीवन यापन के लिए मासिक मानदेय राशि न्यूनतम ₹25,000 प्रदान की जाए, जो उनके योगदान के सम्मान में हो। नायक ने बताया कि इन सुविधाओं को लागू करने के लिए स्पष्ट नीति और त्वरित कार्यान्वयन तंत्र स्थापित किया जाए।
यह कदम न केवल पद्मश्री पुरस्कारियों के प्रति सम्मान व्यक्त करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि झारखंड के युवा और समाज उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें। वे सरकार से आग्रह करते हैं कि इस मांग पर शीघ्र विचार किया जाए और इसे आगामी बजट सत्र में शामिल किया जाए।
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