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मनरेगा में बदलाव के ख़िलाफ़ वामपंथी दलों ने जुलूस निकालकर किया प्रदर्शन

मनरेगा को खत्म करने की साज़िश के ख़िलाफ़ आंदोलन तेज करने का आह्वान

एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। मनरेगा में मनमाने ढंग से बदलाव कर करोड़ों श्रमिकों, गरीबों एवं किसानों के हितों पर केंद्र की मोदी सरकार द्वारा किया गया हमला के खिलाफ वामपंथी दलों क्रमशः भाकपा माले, माकपा एवं भाकपा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने 22 दिसंबर को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन चौक से जुलूस निकालकर समाहरणालय पर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में मनरेगा को कृषि से जोड़ने, मजदूरी एवं काम का अवसर बढ़ाने एवं मनरेगा कानून को पुनर्बहाल करने, मजदूर विरोधी 4 श्रम कोड वापस लेने, दलित बस्तियों पर चलाये जा रहे बुलडोजर एक्शन पर रोक लगाने की मांग की गयी।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में भाकपा, माकपा एवं भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने शहर के स्टेशन चौक से अपने-अपने हाथों में झंडे, बैनर एवं मांगों से संबंधित नारे लिखे तख्तियां लेकर जुलूस निकाला।

जुलूस नारा लगाते समस्तीपुर स्टेशन चौक, स्टेशन रोड, पुरानी पोस्ट आफिस रोड, चीनी मिल चौक, ओवर ब्रीज चौराहा, स्टेडियम गोलंबर होते समाहरणालय पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। तत्पश्चात जुलूस अंबेडकर स्थल पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता माकपा जिला सचिव रामाश्रय महतो, भाकपा जिला सचिव सुरेंद्र कुमार मुन्ना एवं भाकपा माले जिला सचिव उमेश कुमार ने संयुक्त रूप से की।

सभा को भाकपा माले के जीबछ पासवान, उपेंद्र राय, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, ललन कुमार, अमित कुमार, सुरेश पंडित, महेश कुमार, भाकपा के गजेंद्र प्रसाद चौधरी, अनील प्रसाद, शंकर प्रसाद साह, रामचंद्र राय, शत्रुधन पंजी, मो. मुन्ना, अर्जुन कुमार, महेंद्र नारायण राय, माकपा के रामदयाल भारती, शाह जफर इमाम, सत्यनारायण सिंह, रामसागर पासवान, रघुनाथ राय, रामप्रकाश यादव, उपेंद्र राय आदि ने संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला सचिव उमेश कुमार ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान वामपंथी दलों के प्रयास से मनरेगा को कानूनी दर्जा दिया गया। मनरेगा ऐसा क्रांतिकारी कदम था, जिसका फायदा देश के करोड़ों ग्रामीण व गरीब परिवारों को मिला। इसने आमजनों को रोजगार का कानूनी हक़ दिया जिससे ग्राम पंचायतों को ताकत मिली। लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया है।

न सिर्फ महात्मा गांधी का नाम हटाया, बल्कि मनरेगा का स्वरूप मनमाने ढंग से बदल दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस कानून को कमजोर कर देश के करोड़ों किसानों, श्रमिकों और गरीबों के हितों पर हमला किया है।
माकपा जिला सचिव रामाश्रय महतो ने मोदी सरकार से मनरेगा का बदले गये नाम जी राम जी वापस लेने, मनरेगा कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाने की साज़िश बंद करने, मनरेगा में संपूर्ण राशि का वहन केंद्र सरकार द्वारा करने, मजदूरी बढ़ाने, मनरेगा को कृषि से जोड़ने की मांग की।

भाकपा जिला सचिव सुरेंद्र कुमार मुन्ना ने किसानों- मजदूरों से जन विरोधी- फासीवादी मोदी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा का मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर मोदी सरकार महात्मा गांधी की पुन: हत्या की साज़िश कर रही है, जिसे वाम दल कामयाब नहीं होने देगी। इसके खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। मौके पर संयुक्त वाम दलों द्वारा आगामी 5-6 जनवरी को जिला के सभी प्रखंडों पर धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की गयी।

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