एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची मे आयेदिन की बंदी और प्रतिदिन हत्याओं ने झारखंडी जनमानस के जनजीवन को प्रभावित किया है। केंद्रीय गृहमंत्री संज्ञान ले और विधि व्यवस्था समीक्षा हेतु एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमण्डल झारखंड भेजे। झारखंड की हेमंत सरकार की फेल विधि व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करे नही तो अपना इस्तीफा दे।
उपरोक्त बाते 27 मार्च को रांची बंद और युवा नेता सह जनप्रतिनिधि अनील टाइगर की दिन दहाड़े हत्या एंव संपूर्ण झारखंड मे प्रतिदिन हो रहे हत्या तथा राज्य मे विधि व्यवस्था फेल होने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही।
उन्होंने कहा कि राज्य में कानून–व्यवस्था ध्वस्त हो गई है और अपराधियों के हवाले राज्य की जनता हो चुकी है। जिस कारण राज्य में हत्याओं का दौर चल पड़ा है। आए दिन हत्याएं हो रही है और पुलिस प्रशासन सिर्फ बयानबाजी कर बोल बच्चन की भूमिका मे नजर आ रही है। आमजन दहशतगर्दी मे जीने को मजबुर है।
नायक ने भाजपा नेता अनिल टाइगर की हुई हत्या पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और राज्य अपराधियों-माफिया के हवाले हो चुका है। उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार को झारखंड के दलित, आदिवासी, पिछड़े, मूलवासी समाज की हो रही हत्याओं एवं उनके जान माल की कोई चिंता नहीं है। जब राज्य की जनता ही सुरक्षित नहीं तो ऐसी सरकार को सत्ता मे बने रहने का नैतिक अधिकार नही है। अब तो ऐसा लगता है कि झारखंड की जनता का भगवान ही मालिक है।
नायक ने कहा कि राज्य मे गिरती विधि व्यवस्था के कारण अपराधियों एवं दंगाईयों का मनोबल बढ़ा है। आज राज्य में कोई भी अपने को सुरक्षित महसुस नही कर पा रहा है। अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि झारखंड की राजधानी रांची के सबसे चर्चित कांके थाना से थोड़ी दूर पर ही अपराधी दिन दहाड़े एक राजनीतिक नेता की हत्या कर देता है। ऐसे मे केंद्रीय गृह मंत्रालय को राज्य की विधि व्यवस्था के प्रति तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमण्डल झारखंड की विधि व्यवस्था की समीक्षा हेतु भेजा जाना चाहिए, ताकि राज्य मे विधि व्यवस्था मे सुधार किया जा सके।
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