गरीब गुरबों के रहनुमा थे स्व कृष्ण मुरारी पांडेय
एन.के.सिंह/फुसरो (बोकारो)। दीन दुखियों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहने के कारण जाने जाते रहेंगे स्वर्गीय कृष्ण मुरारी पांडेय।
स्व पांडेय बोकारो जिला (Bokaro District) के हद में बेरमो कोयलांचल सहित उत्तरी छोटानागपुर संथाल परगना एकीकृत बिहार में सबसे लोकप्रिय थे।
उनका जन्म 11 नंवबर 1939 को अमावस्या दीपावली की रात गया स्थित ठाकुरबाडी में हुआ था। स्व. पांडेय का मूल गांव बिहार के औरंगाबाद जिला के हद में तमसी है। उनके पिता स्वर्गीय बागेश्वर पांडेय बेरमो कोयलांचल में नौकरी करते थे।
जिसके कारण स्वर्गीय पांडेय 12 वर्ष की उम्र में ही बेरमो कोयलांचल आ गए थे। रामविलास हाई स्कूल से मैट्रिक पास करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए औरंगाबाद चले गए। वहां उन्होंने ए एन सिन्हा कॉलेज से स्नातक तक शिक्षा प्राप्त किया। वहां से पुनः बेरमो वापस लौट आए।
सीसीएल में कुछ वर्षों तक नौकरी भी किए। विद्यार्थी जीवन से ही राजनीतिक में दिलचस्पी थी। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर बिहार के मुख्यमंत्री स्वर्गीय बिंदेश्वरी दुबे के साथ राजनीति में कूद पड़े। फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जो भी लोग बाबा के पास आते खाली हाथ नहीं लौटते थे। उनकी राजनीतिक सुझ बुझ को देखते हुए बिहार कांग्रेस कमेटी द्वारा 1989 में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन्हें गिरिडीह जिला का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। बाद में बोकारो जिला गठन के बाद 1992 मे उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया।
बिहार इंटक उपाध्यक्ष सहित राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के कई पदों पर कई वर्षों तक सुशोभित रहे। 13 मई 1995 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई।
इसके बाद उनके पुत्र रबींद्र कुमार पांडेय को कांग्रेस ने बोकारो जिलाध्यक्ष बना दिया। राजनीतिक उथल-पुथल के बाद कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने पर वर्ष 1996 में रबींद्र पांडेय को भाजपा का टिकट मिला और वह अपने पिता की छवि के कारण पांच बार गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के सांसद बने।।
मजदूर नेता स्वर्गीय कृष्ण मुरारी पांडेय की 82वीं जयंती समारोह 4 नवंबर को गिरिडीह के 16वीं लोकसभा सांसद रबींद्र कुमार पांडेय के फुसरो स्थित आवासीय कार्यालय पर पूर्वाहन 11 बजे से मनायी जायगी। उक्त जानकारी पूर्व सांसद पांडेय के निजी सचिव मृत्युंजय कुमार पांडेय ने दी।
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