कसमार के मंजूरा में सरहुल पर रंगारंग कुड़माली सांस्कृतिक का कार्यक्रम
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड के मंजूरा गांव में बीते 16 अप्रैल को सरहुल पूजन किया गया। इस अवसर पर आदिवासी कुड़मी समाज मंजूरा द्वारा रात्रि में रंगारंग कुड़माली झूमर एवं पाता नाच कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिसमें पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध कुड़माली लोकगीत गायक भोलानाथ महतो, ममता महतो एवं राजदूत महतो द्वारा एक से बढ़कर एक कुड़माली झूमर एवं अन्य गीत की प्रस्तुति की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत अखाड़ा वंदना के साथ की गई। इसके बाद उपस्थित श्रोता एक से बढ़कर एक सुरूचिपूर्ण गीतों का आंनद लेते रहे। इस अवसर पर मुख्य रूप से पहुंचे कुड़माली नेगाचारी गुरु संतोष कटियार ने कहा कि कुड़मी जाति नहीं बल्कि, विशुद्ध रूप से जनजाति है। जिसकी अपनी आदिम लक्षण, विशिष्ट संस्कृति व भौगोलिक अलगाव का क्षेत्र है।
कहा कि अपनी भाषा, संस्कृति, परब-त्यौहार, देवाभूता हैं। जन्म, बिहा एवं मृत्यु संस्कार के अपने नेग-नियम है। जो किसी हिंदू वैदिक संस्कृति से पूर्णतया भिन्न है। उन्होंने कहा कि अपनी विशिष्ट संस्कृति को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। तभी कुड़मी जनजाति की पहचान सुरक्षित रहेगा।

वही कुड़मी जनजाति के शोधकर्ता दीपक कुमार पुनरिनयार ने कहा कि सरकारी दस्तावेज एवं हमारी विशिष्ट जनजातीय लक्षण बता रही हैं कि कुड़मी जाति नहीं जनजाति है, लेकिन सरकार इन सब के बावजूद भी कुड़मी को जनजाति की सूची में शामिल नहीं कर रही है। इसके लिए और संघर्ष करने की जरूरत है।
मौके पर मौके पर राजेन्द्र महतो, अनंत कड़हआर, मुरली पुनुरिआर, उमाचरण गुलिआर, टुपकेश्वर केसरिआर, जलेश्वर हिंदइआर, प्रवीण केसरिआर, सहदेव टिडुआर, पियूष बंसरिआर, महावीर गुलिआर, ज्ञानी गुलिआर, भागीरथ बंसरिआर, मुरली जालबानुआर, सुभाष हिन्दइआर, सुलचंद गुलिआर, मिथिलेश केटिआर, आदि।
उमेश केसरिआर, अखिलेश केसरिआर, अमरनाथ गुलिआर, सदानंद गुलिआर, लखीकांत केसरिआर, विश्वनाथ केसरिआर, शैलेश केसरिआर, दिलीप केसरिआर, निरंजन केसरिआर, धनेश्वर जालबानुआर, जनक केसरिआर, गणेश केसरिआर, कमल जालबानुआर, दुर्गा पुनअरिआर, द्वारिका केसरिआर, कुलेश्वर केसरिआर, लालमोहन गुलिआर, निरंजन केसरिआर, अजीत टिडुआर, बिंदेश्वर पुनुरिआर समेत कई अन्य गणमान्य मौजूद थे।
![]()













Leave a Reply