एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। सम सामयिक चुनौतियों से लड़ता नाटक कुच्ची का कानून की शानदार प्रस्तुति 7 अप्रैल को किया गया।
बिहार की राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला के मुख्य मंच पर 19वां रंगकर्मी प्रवीण स्मृति नाट्य उत्सव के पहले दिन प्रवीण सांस्कृतिक मंच की ओर से नाटक मंचन किया गया। हिंदी में ऐसे नाटको का प्रायः कम ही मंचन होता है, जो सम सामयिक चुनौतियों को सामने रखता हो।
शिवमूर्ति की इस कहानी का नाट्य रुपांतरण अविजीत चक्रवर्ती ने किया, वहीं परिकल्पना व निर्देशन बिज्येंद्र कुमार टॉक ने की। जिसमें नारी स्वतंत्रता व उनके सवालों को एक नये परिपेक्ष्य में पेश किया गया।
प्रस्तुत नाटक कुच्ची का कानून की नायिका कुच्ची जब पंचायत में अपना पक्ष रखते हुए सवाल करती है कि जब मेरे हांथ, पैर, आंख, कान, नाक पर मेरा हक है, तो मेरे कोख पर मेरा हक क्यों नहीं है। नायिका के इस सवाल ने समस्त दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।
यह सवाल उत्पन्न हुआ कि किसी स्त्री का पुरुष से शारिरीक संबंध बनाना व गर्भ धारण करना दोनों अवधारणा भिन्न – भिन्न है। स्त्री के गर्भ धारण को लेकर वैध व अवैध सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में एक स्त्री परिवार और समाज की प्रतिक्रियाओं के समाने परास्त होती रही है।
इस नाटक में यह दर्शाया गया है कि स्त्री परास्त नहीं होती। उसका यह तर्क स्वीकार करना पड़ता है, कि जब उसके शरीर के तमाम अंगों पर उसका अधिकार है तो गर्भ धारण का अधिकार भी उसी का है। इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
यह नाटक नारी की पीड़ा व उसकी आजादी पर सवाल करता हुआ प्रस्तुत होता है। वहीं पुरुष मानसिकता पर एक बड़ा सवाल भी उठाता है। वरिष्ठ रंग निर्देशक ने इस प्रस्तुति को धार देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मंच व्यवस्था से लेकर लाईटिंग पर विशेष ध्यान दिया। सभी अभिनेताओं ने अपनी मेहनत से प्रस्तुति को जीवंत बनाया।
कई किरदारों की बेहतरीन अदाकारी ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। मंचन के दौरान दर्शक उसमें डूबे नजर आए। पात्रों में चर्चित टीवी कलाकार मनीष महिवाल ने हनुमान की छोटी सी भूमिका मे दर्शकों की ताली बटोरी।
जबकि कुच्ची का किरदार रूबी खातून, बनवारी का किरदार मृत्युंजय प्रसाद, सास के किरदार में उज्जवला गांगुली, रमेशर के किरदार में मो. ज़फ़र आलम, सुलक्षणी के किरदार में विनीता सिंह, बलई बाबा के किरदार में राहुल रंजन, अइया का किरदार हेमा कुमारी, धनई बाबा का किरदार कुमार स्पर्श मिश्रा, आदि।
लक्ष्मण चौधरी का किरदार कुणाल कुमार, सुघरा ठाकुराईन का किरदार गरिमा त्रिपाठी, बिटानू का किरदार अभिषेक राज, कुट्टी का किरदार धनिष्ठा कुमारी ने बखूबी निभाया है। वहीं अन्य कलाकारों में कृष्ण कुमार, तान्या कुमारी धनिष्ठा आदि थे। वहीं संगीत संयोजन रोहित चंद्रा, डफ अभिषेक राज, परिकल्पना एवं निर्देशन बिजेंद्र कुमार टॉक ने किया।
इससे पूर्व नुक्कड़ नाटकों की कड़ी में आशा रिपर्ट्री की ओर से भोलाराम का जीव की प्रस्तुति मो. जहांगीर खान के निर्देशन में की गयी। वहीं 8 अप्रैल की शाम विकट कवि नाटक का मंचन सत्य प्रकाश के निर्देशन में किया जाएगा।
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