गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। भगवान भोले शंकर की अनन्य भक्त कृष्णा माता बम को देखने और उनका आशीर्वाद पाने के लिये लालायित रहते हैं लोग। जिनका जयकारा बिहार झारखंड ही नही बल्कि, पूरे देश के शिव भक्त करते हैं। वैशाली की बेटी और बहु कृष्णा रानी से कृष्णा माता बम बनने की कहानी अद्भुत है।
वैशाली जिला (Vaishali District) के हद में भगवानपुर प्रखंड के प्रतापटाँड गांव के एक सम्पन्न किसान की बेटी कृष्णा रानी ने वर्ष 1967 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। जब वह स्नातक में पढ़ रही थी तो उनकी शादी वैशाली जिले के धरहारा भठण्डी के नन्द किशोर पांडेय के साथ हुई।
शादी के समय नन्द किशोर पांडेय वेटनरी डॉक्टर की पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान सन 1971 में नन्द किशोर पांडेय के घर पर नक्सलियों ने हमला कर दिया, जिसमें इनके पिता की हत्या हो गई। इस घटना के बाद कृष्णा रानी का ससुराल छिन्न भिन्न हो गया और कृष्णा ने अपनी पढ़ाई मायके से पूरी की।
उन्होंने मुजफ़्फ़रपुर से शिक्षक प्रशिक्षण की शिक्षा प्राप्त कर भगवानपुर मिडिल स्कूल में शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की। बाद में मुजफ्फरपुर स्थानांतरित होकर चली आई और पूरा परिवार मुजफ्फरपुर में ही आकर रहने लगा।
कृष्णा को भगवान भोलेनाथ पर अशीम विश्वास था। सन 1976 से 1981 तक लगातार सात माह के प्रत्येक सोमवार को डाक बम के रूप में पहलेजा घाट से मुजफ्फरपुर स्थित गरीबनाथ मंदिर 75 किमी की दूरी 9 घण्टे में तय कर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करती आई। सन 1981 में कृष्णा के पति कालाजार से ग्रसित होकर बहुत बीमार हो गये।
तब कृष्णा ने मन्नत मानी क उसके पति ठीक हो जाये तो वह सावन माह के हर सोमवार को बाबा बैधनाथ का जलाभिषेक करेगी। सन 1982 से कृष्णा ने सुल्तानगंज से गंगा का जल लेकर दौड़ते हुय देवघर पहुँच बाबा बैधनाथ का जलाभिषेक करना शुरू किया, जो अनवरत 2019 तक जारी रहा।सुल्तान गंज से गंगा का जल लेकर मात्र 13 घण्टे में 108 किमी की दूरी तय कर देवघर पहुंचने का रिकार्ड भी कृष्णा बम के नाम है।
कृष्णा ने मुजफ़्फ़रपुर शेरपुर मिडिल स्कूल के हेड मिस्ट्रेस से सन 2013 में अवकाश ग्रहण के बाद धार्मिक यात्रा का एक रिकार्ड कायम किया है। कृष्णा बम के रूप में गंगा जल लेकर जब सुल्तानगंज से बाबाधाम चलती हैं तो रास्ते मे इन्हें देखने और इनका आर्शीवाद लेने के लिए भक्तगण सड़क किनारे खड़े रहते हैं।
इन्हें सुरक्षित मार्ग देने के लिये पुलिस बल साथ चलता है बाबाधाम मंदिर तक। प्रशासन (Administration) भी इन्हें जलाभीषेक के लिए विषेष सुविधा देता आया है, जो वर्ष 2019 में बंद हो गया।
जिस वजह से कोरोना काल के बाद वर्ष 2022 से सिर्फ सावन के एक सोमवार को ही अब कृष्णा बम बाबा का जलाभिषेक करेंगी। इस वर्ष कृष्णा बम ने 70 वर्ष की उम्र में भी सोमवार 25 जुलाई को सुल्तान गंज से गंगा का जल लिया और 26 जुलाई को बाबा बैधनाथ पर जल अर्पण किया।
कृष्णा बम की धार्मिक यात्राएं
वर्ष 1989 में गंगोत्री धाम से गंगा जल लेकर पैदल तीन माह में अपने पुत्र के साथ रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पण। मुजफ्फरपुर से अमर नाथ, वैष्णो देवी साइकिल यात्रा। हरिद्वार से एक बार गंगा का जल लेकर बाबाधाम कांवर यात्रा। मानसरोवर की यात्रा। वर्ष 2018 में पाकिस्तान के कट्स धाम में शिवमंदिर की यात्रा।
वर्ष 2022 सावन माह की प्रथम सोमवारी को ओंकारेश्वर जोतिर्लिंग पर जलाभीषेक के बाद नर्मदा के पवित्र जल को कवर पर अपने पुत्र मुकेश पांडेय और 135 श्रद्धलुओं के जत्थे के साथ 140 किमी पैदल चलते हुए उज्जैन में महाकाल का जलाभिषेक के बाद दूसरी सोमवारी को बाबाधाम में बाबा बैधनाथ को गंगा जल अर्पण। इस महान शिव भक्त को नमन।
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