एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के अंतर्गत पश्चिमी संस्कृति पर आधारित वेलेंटाइन डे के तहत 13 फरवरी को किस डे (चुंबन दिवस) को लीचीपुरम मुजफ्फरपुर में प्रकृति, पशु-प्रेम और संवेदना के भाव के साथ मनाया गया।
जानकारी देते हुए सूर्यी देवी फाउंडेशन के निदेशक अनिल कुमार अनल ने बताया कि लीचीपुरम अभियान के संस्थापक पर्यावरणविद् सुरेश कुमार गुप्ता ने चुंबन दिवस पर प्रकाश डालते हुए बताया कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक दिखावे से हटकर भारतीय संस्कृति में निहित करुणा, स्नेह और सहअस्तित्व के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना है।
उक्त अभियान के मीठा मुस्कुराने का संदेश संस्कृति की खुशबू के साथ थीम के अंतर्गत बताया गया कि आज विश्व के कई देशों में गाय के आलिंगन और चुंबन को थेरेपी के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ रहिवासी शांति पाने के लिए 20 मिनट से 1 घंटे तक के अनुभव हेतु 1500 से 6000 रुपये तक का भुगतान करते हैं। कहा गया कि जापान में गाय से हग (आलिंगन) करने के लिए बुकिंग होती है।
स्विट्ज़रलैंड में इसे तनाव दूर करने का अनुभव कहा जाता है।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि लीचीपुरम की संस्कृति इन सबसे अलग है। यहाँ गाय कोई थेरेपी नहीं बल्कि माता स्वरूप है। स्नेह कोई सेवा नहीं बल्कि संस्कार है और आलिंगन कोई अनुभव नहीं बल्कि भावना है। जहाँ दुनिया पैसे से सुकून खोज रही है, वहीं हमारी मिट्टी प्रेम को जीवन जीना सिखाती है।
उक्त अभियान के माध्यम से आमजनों से आह्वान किया गया कि वे पेड़ों का आलिंगन करें, गाय माता को स्नेह दें, प्रकृति से जुड़ें और यह दिखाएँ कि प्रेम खरीदा नहीं जाता, जिया जाता है। उक्त कार्यक्रम मुजफ्फरपुर के अभिनव नि:शुल्क शिक्षा केंद्र रंभा चौक कन्हौली, गुड शेफर्ड स्कूल दादर, किड्स वैली स्कूल अयाची ग्राम के प्राकृतिक वातावरण में आयोजित किया गया। जिसमें निदेशक अर्चना सिंह, समाजसेवी अनिल कुमार अनल, डॉ अमित कुमार, गौरव राज, सुनील कुमार पिंटू, दीपांशु ठाकुर, बबलू शाही, मोहम्मद बाजपेई सहित दर्जनों किसान, शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। साथ हीं विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि लीचीपुरम संस्कृति, संस्कार और संवेदना की पहचान है।
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