ममता सिन्हा/तेनुघाट (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में तेनुघाट में खरवार भोगता समाज विकास संघ केंद्रीय सामिति के अध्यक्ष दर्शन गंझू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झारखंड के राज्यपाल व मुख्यमंत्री से पारसनाथ पहाड़ को पर्यटन स्थल न बनाये जाने की मांग की है। पत्र में पारसनाथ को पूर्व की भांति तीर्थ स्थल ही रहने देने की मांग की गयी है।
प्रेषित पत्र में खरवार भोगता समाज के अध्यक्ष गंझु ने कहा है कि इस स्थल से आदिवासियों का भी आस्था जुड़ा हूआ है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष गंझू ने पत्र में कहा है कि पारसनाथ पर्वत जैन धर्मवालियों का सबसे बड़ा धर्मिक ऐतिहासिक तीर्थ स्थल माना जाता है। जिस पर जैन समाज का आस्था का केंद्र भी है। इसे झारखंड सरकार पर्यटन के क्षेत्र के रूप में घोषित किया है, जिससे जैन समाज की भावनाओ को काफी ठेस पहुँचा है।
मालूम हो कि 2 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा अधिसूचना जारी किया गया है कि मधुवन स्थित पारसनाथ पहाड़ को वन्य जीव अभ्यारण का एक भाग घोषित कर पारसनाथ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एवं उसकी तलहटी को इको सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया गया है। इसके अनुसार इस निर्देश में जैन समाज से कोई बात-विचार नहीं किया गया और न तो कभी इस मुददे पर राष्ट्रीय व स्थानीय स्तर पर इसका कोई बैठक कर यहां के रहिवासियों के साथ जानकारी साझा किया गया।
ज्ञात हो कि सम्मेद शिखर पारसनाथ पहाड़ जैन धर्म के वर्तमान बीस तीर्थ स्थलों में यह भी भगवन महावीर का मोक्ष स्थल है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस पहाड़ पर हजारों वर्षों से जैन समाज के सभी अनुयायी पवित्रता का पालन करते हुए नंगे पावँ, शुद्ध वस्त्र धारण कर वर्ष में अनेक बार 27 किलोमीटर पैदल चल कर पूरे पारसनाथ पहाड़ की वंदना करते है।
हजारों यात्री पुरे पहाड़ की तलहटी में 58 किलोमीटर परिक्रमा करते है। इसलिए जैन समाज की धार्मिक आस्था, पवित्रता एवं गरिमा बनाये रखने की जरुरत है। साथ ही साथ पारसनाथ पहाड़ के चारो तरफ नीचे तलहटी और उसके अगले-बगल आदि काल से आदिवासी मूलवासी समाज अपने पूर्वजो के द्वारा बसाये हुए है।
पर्यटन क्षेत्र घोषित होने से रहिवासियों को पलायन का दंश झेलना पड़ सकता है। जिससे उनका जीवन संकट में आ जायेगा और हजारों साल से रह रहे रहिवासी बेघर हो जायेंगे। उनके परिवार बिखर जायेंगे। जिसके चलते लोग काफी डरे-सहमे हुए है।
गंझु ने राज्य एवं केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि पारसनाथ पहाड़ को घोषित पर्यटन क्षेत्र को अविलम्ब रदद् कर हजारो वर्षो से रह रहे रहिवासियों की चिंता को दूर करे। साथ ही पारसनाथ पहाड़ को पर्यटन स्थल के सूची से हटाकर तीर्थ स्थल ही रहने दिया जाये।
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