एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार की आर्थिक राजधानी मुजफ्फरपुर शहर के सरैयागंज स्थित नवयुवक समिति सभागार में 28 जनवरी को मासिक कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया गया। उक्त आयोजन नटवर साहित्य परिषद के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर कवि सम्मेलन की अध्यक्षता विजय शंकर मिश्र, मंच संचालन मुजफ्फरपुर की युवा कवियित्री सविता राज तथा धन्यवाद ज्ञापन सुमन कुमार मिश्र ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के गीत से किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे कवि विजय शंकर मिश्र ने सुख दुःख सब कुछ साथ लिए बढ़ता चल राही सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि डॉ जगदीश शर्मा ने पलटू राम, सलटने से पहले ही पलट गए सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। सुमन कुमार मिश्र ने नदियां यूं ही नहीं निकली है पहाड़ों से, शिखर पर वर्षों से जमें बर्फ को पिघलना पड़ा है को जमकर तारीफ मिली।

इस अवसर पर युवा कवियित्री सविता राज की गजल कब कहां ढहती रही हैं बेटियां, यातना सहती रही हैं बेटियां को भी खूब सराहना मिली। वहीं ओमप्रकाश गुप्ता ने हृदय में रहता हूँ सबके, मेरी अलग पहचान नहीं है को वाहवाही मिली। अंजनी कुमार पाठक ने कण कण में हैं श्रीराम, तन मन के हैं मेरे प्राण को तारीफ मिली। अरुण कुमार तुलसी ने विचित्र होता है अफवाह का आडंबर जाल को सभी ने सराहा।
यशपाल कुमार ने गुदरी के लाल कर्पूरी सुनाया। रामवृक्ष चकपुरी ने छिना हंसता हुआ चमन, डूब गया कश्ती किनारे में ही सुनाया। अशोक भारती ने चांदनी रात में मिलो तो, कुछ बात बने सुनाकर सबको गुदगुदाया। कवि अखिलेश सिंह ने ये दुनिया बन जाए जन्नत,आपस में अगर बढ़े मुहब्बत मुशायरा प्रस्तुत किया।
मुस्कान केशरी ने अवध में पहुंचे श्रीराम सुनाकर तालियां बटोरी। मुन्नी चौधरी ने श्रद्धा के फूल चढ़ाऊंगी सुनाया। कवि सम्मेलन सह मुशायरा कार्यक्रम को सफल बनाने में उपरोक्त के अलावा रवि कुमार, चिराग पोद्दार, अमर कुमार, सुरेंद्र कुमार इत्यादि की अहम भूमिका रही।
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