साभार/ बेंगलुरु। कर्नाटक (Karnataka) के सियासी नाटक में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार (Karnataka Speaker K R Ramesh kumar) ने दल-बदल कानून के तहत जेडीएस-कांग्रेस के 14 विधायकों अयोग्य करार दे दिया। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष ने 3 विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था। बता दें कि कांग्रेस-जेडीएस (Congress- JDS) के 16 विधायकों ने अपनी पार्टी से विद्रोह करते हुए इस्तीफा दे दिया था, जबकि सरकार को समर्थन कर रहे एक निर्दलीय ने भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कुमारस्वामी (Kumarswamy) सरकार बहुमत साबित करने में असफल रही थी। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yeddyurappa) को कल (सोमवार) को सदन में अपना बहुमत साबित करना है। ऐसे में स्पीकर का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
इस ताजा फैसले के बाद विधानसभा में विधायकों की संख्या 207 बच गई है। यानी बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी। बता दें कि रहे कि बीजेपी के पास खुद के 105 विधायक मौजूद हैं। 2023 तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे अयोग्य विधायक स्पीकर ने जिन विधायकों को अयोग्य घोषित किया है, उनमें रोशन बेग, आनंद सिंह, एच विश्वनाथ, एसटी सोमशेखर शामिल हैं।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने गुरुवार को 3 बागी विधायकों को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने तक अयोग्य घोषित कर दिया था। गौरतलब है कि विधानसभा का कार्यकाल 2023 तक है। इसका मतलब है कि तबतक अयोग्य विधायक विधानसभा का उपचुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।
हालांकि अगर समय से पहले विधानसभा भंग हुई तभी 2023 से पहले ये फिर से विधायक बन सकते हैं। अयोग्य घोषित होने वाले में एक निर्दलीय विधायक आर शंकर भी शामिल थे। स्पीकर ने इसके अलावा कांग्रेस के दो बागी रमेश जारकिहोली और महेश कुमातल्ली को भी अयोग्य करार दिया था। इससे पहले कुल 16 विधायकों ने एच डी कुमारस्वामी सरकार से बगावत कर स्पीकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। विधायकों की बगावत के कारण मंगलवार को 14 महीने पुरानी कुमारस्वामी सरकार गिर गई थी।
स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य करार दिए गए सदस्य ना तो चुनाव लड़ सकते हैं, ना ही सदन का कार्यकाल खत्म होने तक विधानसभा के लिए निर्वाचित हो सकते हैं। स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि वह मानते हैं कि तीनों सदस्यों ने स्वेच्छा और सही तरीके से इस्तीफा नहीं दिया और इसलिए उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया और दल-बदल कानून के तहत उन्हें अयोग्य ठहराने की कार्रवाई की। कुमार ने कहा, ‘उन्होंने संविधान (दलबदल विरोधी कानून) की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों का उल्लंघन किया और इसलिए अयोग्य करार दिए गए।’
25 जुलाई को अयोग्य घोषित किए गए विधायक
- रमेश जारकिहोली (कांग्रेस)
- महेश कुमतल्ली (कांग्रेस)
- आर शंकर (निर्दलीय)
28 जुलाई को अयोग्य घोषित किए गए विधायक
- ए एच विश्वनाथ (जेडीएस)
- नारायण गौड़ा (जेडीएस)
- के गोपालैया (जेडीएस)
- प्रताप गौड़ा पाटिल (कांग्रेस)
- शिवराम हेब्बर (कांग्रेस)
- बीसी पाटिल (कांग्रेस)
- बयराती बासवराज (कांग्रेस)
- एसटी सोमशेखर (कांग्रेस)
- के सुधाकर (कांग्रेस)
- एमटीबी नागराज (कांग्रेस)
- श्रीमंत पाटिल (कांग्रेस)
- रोशन बेग (कांग्रेस)
- आनंद सिंह (कांग्रेस)
- मुनिरत्ना (कांग्रेस)
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