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निर्माण के एक दशक बाद भी चालू नहीं हो सका सोनपुर का काली घाट मुक्तिधाम

बरसात और बाढ़ में शव दाह में रहिवासियों को उठानी पड़ती हैं मुश्किलें

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर नगर पंचायत क्षेत्र में कालीघाट के निकट स्थित एकमात्र मुक्तिधाम शव दाह गृह को एक दशक बाद भी विभागीय ग्रहण लगा हुआ है। इसका आजतक उद्घाटन तक नहीं हो सका है। शवदाह गृह चालू नहीं होने से दूरदराज से आने वाले शव यात्रियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

परिणाम यह कि ग्रामीण विकास विभाग द्वारा लगभग 28 लाख की लागत से निर्मित इस मुक्तिधाम में अभी तक एक भी शव का अग्नि संस्कार नहीं हो पाया। बरसात और बाढ़ के मौसम में जब गंगा एवं गंडक नदी उफान पर होती है। ऐसे में शव दाह के लिए कहीं खाली भूमि दिखाई नहीं पड़ती। उक्त शव दाह गृह का चालू होना नितांत आवश्यक बताया जा रहा है।

इस मुक्ति धाम का निर्माण गंडकी नदी के जल को प्रदूषण से बचाने के लिए किया गया था, परंतु आज भी इस मुक्तिधाम के सामने गंडकी नदी के तट पर शवों का संस्कार किया जाना बदस्तूर जारी है। अभी गंडकी के जल स्तर में लगातार वृद्धि जारी है, जिससे घाट किनारे की रेत पर कुछ दिनों के बाद शवों का अग्नि संस्कार करना संभव नहीं हो पायेगा। ऐसे में आसपास के रहिवासी मुक्तिधाम के सामने बने नमामि गंगे घाट पर खुले में अपने मृत परिजनों के शव का अग्नि संस्कार करने के लिए बाध्य होंगे।

इस बावत स्थानीय जन बताते हैं कि अगर मुक्ति धाम चालू रहता तो निकटवर्ती सबलपुर दियारा, राहर दियारा, सोनपुर, सोनपुर आदम, पहाड़ीचक आनंदपुर, सवाईच सहित आसपास के दर्जनों गांवों के वाशिंदों को बरसात और बाढ़ के दिनों मे अपने मृत परिजनों के शवदाह में सहूलियत होती।

लोक सेवा आश्रम से मिली थी मुक्तिधाम के लिए छह कट्ठा जमीन

बताया जाता है कि स्थानीय लोकसेवा आश्रम के महंत विष्णु दास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने शवों के अंतिम संस्कार में हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए लोक कल्याण की भावना से ओत-प्रोत होकर मुक्तिधाम और सड़क के निर्माण के लिए अपनी कीमती छह कट्ठा जमीन दान में दी थी। बाबा की लालसा और उनकी आकांक्षा पर विभाग खड़ा नहीं उतरा। मुक्तिधाम के चालू नहीं होने से संत विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा की भावना भी आहत हो रही है। वे बताते हैं कि रहिवासियों की कठिनाइयों को देखते हुए संबंधित विभाग इसे चालू करे।

लोक सेवा आश्रम के विधि सलाहकार अधिवक्ता विश्वनाथ सिंह बताते हैं कि लोक सेवा आश्रम की भूमि पर एक दशक पूर्व बना शवदाह गृह का आज तक उद्घाटन नहीं हो सका है। सबंधित विभाग के अधिकारियों की शिथिलता के कारण इसके चालू नहीं होने से स्थानीय जनता भी दुखित है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आश्रम के संत विष्णुदास उदासीन ने जनहित की नियत से अपनी भूमि दान की थी, जिस पर यह शवदाह गृह बना है। अबतक इसके चालू नहीं होने से यह मुक्तिधाम नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। सरकार की लाखों की राशि से जनहित के कल्याणार्थ बना यह शवदाह गृह अपने उद्देश्यों में असफल प्रमाणित हुआ है।

क्या कहते हैं सोनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष अजय साह

सोनपुर नगर पंचायत अध्यक्ष अजय साह ने पूछने पर 29 जून को बताया कि इस मुक्तिधाम का निर्माण तो हुआ, परन्तु आजतक चालू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि बरसात और बाढ़ के मौसम में यहां शवों के अंतिम संस्कार में परेशानी होती है। संबंधित विभाग मुक्ति धाम की साफ सफाई करवाकर इसे चालू कराने का प्रयास करे। जहां देखरेख के अभाव में क्षति पहुंची है उसकी मरम्मती हो। उन्होंने कहा कि शवदाह आज एक ज्वलंत सवाल है। इस पर विभागीय स्तर पर सार्थक कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि सुना है कि एक साथ यहां चार शवों का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। परिजनों के बैठने के लिए शेड, गार्ड रूम, अंतिम संस्कार से संबंधित सामग्री की बिक्री के लिए तीन दुकानें और बोरिंग की व्यवस्था भी की गई है। इन सभी की मरम्मती की आवश्यकता है। पीछे के शौचालयों की मरम्मती हो।

सोनपुर नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह बबलू, सोनपुर दक्षिणी मंडल भाजपा अध्यक्ष दीपक शर्मा, भाजपा के वरिष्ठ नेता धनंजय सिंह, सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के सरपंच दिलीप सिंह आदि ने जनहित में मुक्तिधाम को शीघ्र चालू करने की सरकार से मांग की है। इस संबंध में पूछे जाने पर कहा गया कि यह मुक्तिधाम नौ वर्षों से बनकर तैयार है और अभी तक चालू नहीं हो सका है। इस पर संबंधित विभाग को संज्ञान लेना चाहिए।

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