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महानवमी पूजा उपरांत ब्राह्मणों को कराया गया ज्योनार

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के खास पेटरवार क्षेत्र तथा प्रखंड क्षेत्र के विभिन पंचायतों के ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि एक अक्टूबर को मंदिरों में मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि विधान से किया गया।

जानकारी के अनुसार मां सिद्धिदात्री की पूजा के उपरांत पूजा समिति द्वारा कहीं ब्राह्मणों तो कहीं नौ कन्याओं को भोजन कराया गया। इस अवसर पर पेटरवार प्रखंड के हद में अंगवाली गांव स्थित मंडपवारी चौक के दुर्गा माता मंदिर में हवन अनुष्ठान सम्पन्न किए जाने के बाद उपस्थित डेढ़ दर्जन ब्राह्मणों को सात्विक ज्योनार (भोजन) कराया गया। वहीं संध्या आरती में काफी संख्या में आसपास के ग्रामीण इलाकों की महिला, पुरुष, बच्चे, युवक, युवतियां, बुजुर्ग आदि भाग लिए। आज रात्रि में जमकर हुई भारी बारिश ने भी मेला में अपना प्रभाव दिखाया, जिसके कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलना पड़ा।

ज्ञात हो कि पेटरवार प्रखंड के हद में अंगवाली में सन् 1855 ईस्वी से मां दुर्गा की पूजा हो रही है, यानि 170 वर्षों से अनवरत यहां शारदीय नवरात्र की पूजा होती रही है।
मिली जानकारी के अनुसार उस वक्त गांव के ही चार जिगरी दोस्त दिवंगत दुर्गा प्रसाद भगत, अनु प्रगनेत, सालिक साव व देबु लाएक आदि ने अंगवाली के उक्त स्थल पर पत्थर के आकार का दुर्गा माता की प्रतिमा स्थापित पर मां की पूजा शुरू किया गया था। कालांतर में गांव के कई गणमान्य रहिवासी अग्रणी भूमिका निभाते हुए पूजा का दायित्व संभालते रहे।

कहते हैं कि, यहां पहले बकरे की बलि दी जाती थी, जिसे लगभग 120 वर्ष पूर्व चलकरी गौशाला के संस्थापक द्वारिकाधीश ने अपनी ओर से पूरी प्रयास करके बकरे की बलि-प्रथा को वर्ष 1905 में बंद कराके वैष्णवी पूजा शुरू कराया। उसी दिन से हर वर्ष नवमी के दिन बनिया कोहड़ा (भुवा कोहड़ा) की बलि चढ़ाई जाती है।

बता दें कि, उक्त स्थल पर स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बड़े बड़े पत्थरों को जोड़कर मंदिर का निर्माण किया गया, जिसे वर्तमान में मंदिर का भव्य स्वरूप दिया गया है।उस दौर से अबतक जायसवाल, मिश्रा, नायक, कपरदार, स्वर्णकार, नाई ठाकुर, पॉल, कांदू आदि परिवार के सदस्य अबतक पूजा का दायित्व संभालते रहे हैं। यहां विजयदशमी के दिन मेले का आयोजन होता रहा है। पुजारी का दायित्व शुरू से लेकर अबतक चटर्जी परिवार के सदस्य संभालते रहे हैं।

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