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जुग जाहेर सरना धोरोम गाढ़ जारंगडीह में बाहा बोंगा महोत्सव धुमधाम से सम्पन्न

अधिकार मांगने से नहीं छीनने से मिलेगा-मंत्री योगेंद्र प्रसाद

महोत्सव में आदिवासी नृत्य ने कार्यक्रम में लगाये चार चांद

आयोजको की पूर्व घोषणा के बाद भी नहीं पहुंचे सीएम हेमंत व् विधायक कल्पना सोरेन

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में बेरमो प्रखंड के जारंगडीह स्थित जुग जाहेर धोरोम गाढ़ सरना स्थल में 13 अप्रैल को बाहा बोंगा महोत्सव (सरहुल पर्व) श्रृद्धा व् भक्ति के साथ आयोजित किया गया। महोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के पेयजल स्वच्छता विभाग सह उत्पाद विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद मुख्य रूप से शामिल हुए। महोत्सव में आयोजको द्वारा पूर्व में घोषणा के बाद भी राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन तथा बेरमो विधायक नहीं शामिल हो सके।

इस अवसर पर राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता सह मध निषेध व् उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति, पहचान और परंपरा बनाए रखने के लिए इस प्रकार का आयोजन साल में दो-तीन बार करना चाहिए। उन्होंने अपनी धर्म, संस्कृति व् परंपरा के मामले में एकजूटता बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही केंद्र सरकार पर राज्य के साथ दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया।

मंत्री ने कहा कि जिस विभाग में वे मंत्री हैं उस विभाग का 26 सौ करोड़ रुपया केंद्र द्वारा नहीं दिए जाने के कारण राज्य में जल नल योजना फलीभूत नहीं हो पा रहा है। विभाग के पास एक फूटी कौड़ी तक नहीं है। इतना ही नहीं केंद्र सरकार का केवल टैक्स का एक लाख 36 हजार करोड़ केंद्र रखे है। इसके लिए स्वयं मुख्यमंत्री द्वारा कई बार केंद्र को ध्यान आकृष्ट कराया गया है, बावजूद इसके केंद्र की कार्य प्रणाली एवं सोंच में खोट है।

सरना समिति द्वारा मंत्री को दिए पांच सूत्री मांग पत्र के संदर्भ मंत्री ने कहा कि इसके लिए समाज को भी जागरूक होकर सड़क पर लगातार आंदोलन करना होगा, जिसमें राज्य सरकार आपके साथ है। उन्होंने कहा कि सरकार यह व्यवस्था बनाने का प्रयास कर रही है कि राज्य में 70 प्रतिशत आरक्षण लागू हो। लेकिन इसमें केंद्र सरकार अड़ंगा डाल रही है। उन्होंने रैयतों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि आज बोकारो स्टील प्लांट में आंदोलन कर रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर सीआईएसएफ द्वारा बर्बर पुलिसिया जुल्म के तहत लाठी चार्ज कर आंदोलनकारी को मौत के घाट उतार दिया जाता है, इसलिए एकजुट होकर ऐसे कई बड़े आंदोलन करना होगा।

कहा कि हमें अपना अधिकार लेने के लिए सड़क पर उतरकर अधिकार छीनना होगा। उन्होंने उक्त मांग पत्र को राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र को भेजने की बात कही। झामुमो बोकारो जिलाध्यक्ष डॉ रतनलाल मांझी ने कहा कि यह आयोजन आदिवासियों के लिए यहां पहला प्रयास था। अगले वर्ष इससे भी भव्य आयोजन करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर कई माननीय अपनी बातों को रखना चाह रहे थे, लेकिन संचालक द्वारा उन्हें नहीं बुलाये जाने के कारण मंचस्थ माननीय नाराज दिखने लगे और सभा समाप्ति के बाद सभा स्थल से बिना कुछ कहे भारी मन से चले गए।

मौके पर विशिष्ट अतिथि मंत्री, आनंद किस्कू, जिलाध्यक्ष मांझी, वरिय नेता मदन मोहन अग्रवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष हीरालाल मांझी, पूर्व जिला उपाध्यक्ष मनोहर मुर्मू, पूर्व जिला सचिव जयनारायण महतो, पूर्व कोषाध्यक्ष व् जिप सदस्य अशोक मुर्मू, संयुक्त सचिव पान बाबू केवट, केंद्रीय सदस्य सदानंद सोरेन, झामुमो नेता अनिल अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष काशीनाथ केवट, दिलीप मुर्मू, लालचंद मांझी, श्रीराम हेंब्रम, गुलाम मुस्तफा, लुदू मांझी, गोमिया प्रखंड अध्यक्ष रीता देवी, बेरमो प्रखंड महिला सेल अध्यक्ष कुंती देवी, सीताराम हांसदा, करमचंद हांसदा, राजाराम मुर्मू, रंजीत महतो, पेटरवार प्रखंड अध्यक्ष लखनलाल महतो आदि उपस्थित थे।

महोत्सव के सफल आयोजन में सोखा बाबा महेश हांसदा, पाहन फूलचंद मांझी (अंबा टोला), सुखदेव मांझी (तुलबुल हरदियामो) सरना स्थल के निगरानी में बाबू मंडा, नरेश मुंडा, धर्मेंद्र मुंडा, विकास मुंडा, प्रकाश मुंडा, रंधीर करमाली, मुकेश, शंभू नायक, नागेश्वर मुंडा, महेश हांसदा, सिमी मुंडा, प्रियंका, पूजा, रिया, पायल, प्रतिमा आदि शामिल थे।

इस अवसर पर अंबा टोला, हरदियामो, मायापुर, चांपी, भुईयाडीह, केसवारी, सोनहर, तुलबुल, लालपनिया, कर्माटांड़, खम्भरा, चुटे, सिमराटांड़ तोपा रामगढ़ से सुशीला बास्के, ममता कुमारी, सुनीता देवी, आशा हेंब्रम सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालू गण मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रिति रिवाज से प्रकृति की पुजा आराधना के साथ किया गया, जबकि पुजा उपरांत पाहन द्वारा श्रद्धालुओ के बीच सखुवा का फुल का वितरण किया गया। वहीं चढ़ावा चढ़ाये गये बकरे की बली के पश्चात खिचड़ी प्रसाद के रूप में बांटे गये। इसके बाद आदिवासी महिलाओं और पुरुषों द्वारा मनमोहक आदिवासी नृत्य ने पुरे कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया।

इस भव्य महोत्सव कार्यक्रम को सफल बनाने में सरना पूजा समिति का मुख्य योगदान देखने को मिला। जबकि यहां की मुख्य व्यवस्था का भार समिति के अध्यक्ष फिनीराम मुर्मू तथा करमचंद हांसदा ने संभाल रखा था। वही इस पूजा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन, बेरमो विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनुप सिंह का आना तय था, मगर अकास्मिक कारणों से उपरोक्त का आगमन नहीं हो पाया। जिसके कारण जनसमूह में मायूसी देखा गया।

जारंगडीह बंद भूमिगत खदान के समीप काली मंदिर के पीछे मैदान में मुख्य सभा स्थल के लिए पंडाल और श्रद्धालुओं के बैठने का इंतजाम किया गया था। जबकि विधि व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए बोकारो थर्मल थाना व कथारा ओपी पुलिस पुरे समय तक कार्यक्रम स्थल पर डटी रही। कार्यक्रम समाप्ति के तुरंत बाद दो गुटों में लात घुस्से चला जिसे पुलिस बल द्वारा शांत कराया गया। यहां बोकारो थर्मल थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर शैलेन्द्र कुमार सिंह स्वंय कमान संभाले थे।

संपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने के लगे समिति के अध्यक्ष फिनीराम सोरेन तथा सचिव करमचंद मांझी, कोषाध्यक्ष आनंद टुडू तथा इस पुजा को सम्पन्न करवाने मे मुख्य पूजारी पाहन अर्जुन हेम्ब्रम, बद्री मुंडा, चांपी के पूर्व मुखिया श्रीराम हेम्ब्रम, मुखिया पति सीताराम मुर्मू, सुखनाथ मुर्मू, गोपीन मुर्मू, विनंदेश्वर मुर्मू, सुरेश किस्कू, अरबिंद कुमार मुर्मू, नरेश टुडू, सुदेश भुईंयाँ, मो. इम्तियाज अंसारी, सुखदेव मुर्मू, दिलीप मुर्मू, विश्वनाथ मुर्मू, जयनारायण महतो, मदन मोहन अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, इकबाल अहमद, रमेश बेसरा, सुरेश किस्कू, मनोहर मुर्मू, काशीनाथ केवट, शमशुल हक, जिला सचिव मुकेश राम महतो आदि ने अहम भूमिका निभाए। कार्यक्रम में मुख्य मंचासीन अतिथियों मे मंत्री के अलावे आदिवासियों के अनेको गणमान्य उपस्थित थे।

बेरमो विधायक प्रतिनिधि ने कहा कि विधायक के निर्देशानुसार इस आयोजन में किसी तरह का विध्न ना हो इसका पुरा ध्यान रखने का जिम्मा उन्हें मिला था, जिसे उन्होंने बाखुबी निभाने का प्रयास किया है। उन्होंने इस आयोजन को बेरमो के लिए ऐतिहासिक बताया। जबकि सरना स्थल के वंशजो ने सीसीएल प्रबंधन के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अगर सीसीएल उसके हक अधिकार नही दिए तो आने वाले दिनों में एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जायेगा। रैयत के वंशज बबलू सोरेन ने कहा कि सीसीएल प्रबंधन से हमारी लड़ाई न्यायालय मे चल रहा है। फैसला आने के बाद मामला साफ हो जायेगा साथ ही यह भी कहा कि आने वाले दिनों में अब यह आयोजन और भी भव्य रुप लेगा।

यहां रैयत सुखदेव मांझी ने बताया कि उक्त सरना स्थल 18 डिसमिल क्षेत्रफल में स्थित है जिसे उसके परदादा गेंदों मांझी ने दिया था। जबकि उसके जमीन का पुरा रकवा कुल 55.85 डिसमिल है, जिसे सीसीएल द्वारा अधिग्रहण के बाद आजतक मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके अलावा बद्री मुंडा का 30 एकड़ जमीन का सीसीएल प्रबंधन उपयोग कर रहा है, जिसका मुआवजा नहीं दिया गया है। महोत्सव में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आये आदिवासी महिला, पुरुष, बच्चे व् बच्चियों की टोली ने लोकधुनो पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित जन समूह को सम्मोहित कर दिया।

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