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मुनि संघ का 27 वर्ष में पहली बार गोमिया आगमन से अनुयायियों में हर्ष

विजय कुमार साव/गोमिया (बोकारो)। जैन मुनि संघ का 27 वर्ष में पहली बार बोकारो जिला के हद में गोमिया आगमन से उनके अनुयायियों में हर्ष व्याप्त है। इस अवसर पर मुनी संघ का जगह-जगह पाद प्रक्षालन एवं आरती उतारी गई।

जानकारी के अनुसार महासमाधि धारक परम पूज्य आचार्य विद्यासागरजी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य समय सागरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि धर्म सागरजी महाराज तथा मुनि भाव सागर महाराज का 27 दिसंबर को बोकारो जिला के हद में श्रीदिगंबर जैन मंदिर गोमिया में दोपहर की बेला में मुनि संघ का 27 वर्ष में प्रथम बार आगमन हुआ।

आर्यिका विमल मति माताजी ससंघ ने आगवानी की जगह-जगह पाद प्रक्षालन किया गया और आरती उतारी गई।
ज्ञात हो कि मुनि संघ का पद बिहार श्रीसम्मेद शिखरजी पाश्वर्यनाथ के लिए चल रहा है। सिवनी से बीते 7 नवंबर को पदयात्रा प्रारंभ हुई थी, जो लगभग हजार किलोमीटर की हो चुकी है। अब पड़ाव सौ किलोमीटर यात्रा शेष है। आगामी 31 दिसंबर को दोपहर एक बजे मंगल प्रवेश 27 वर्ष में प्रथम बार होने की संभावना है।

इस पदयात्रा में उनके साथ कई क्षेत्र के गणमान्य जुड़े हैं। इस अवसर पर आयोजित लघु सभा को संबोधित करते हुए मुनि भावसागर जी महाराज ने कहा कि अच्छी भावना करने से अच्छा कार्य होता है। तीर्थ यात्रा में सहयोग देने वाला भगवान बनता है। जिससे वह दान कर सके, धार्मिक कार्य कर सके। कहा कि महापुरुषों की चेष्टा आश्चर्य जनक होती है। वे धर्म विपत्तियों में मुस्कुराना सिखाते हैं। गुरु की महिमा से मनुष्य की सोई हुई शक्तियां जागती है।

मूर्ख, विद्वान एवं अपवित्र विचारों वाला शुद्ध बन जाता है। जगत में शिष्य उच्चारण से नहीं, उच्च आचरण से शोभित होता है। उन्होंने कहा कि हृदय लोक में शिष्यों का उदय हुए बिना गुरु प्राप्ति संभव नहीं। गुरु अनुभवी होते हैं। वह अनेकों उतार चढ़ाव देख चुके होतें हैं। संयम मनुष्य के जीवन का प्राण है, जीवन रूपी कार में संयम रूपी ब्रेक होना चाहिए।

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