एस. पी. सक्सेना/बोकारो। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में शोषित मुक्ति वाहिनी (शोमुवा) एवं यूनाइटेड मिल्ली फोरम (यूएमएफ) के संयुक्त तत्वावधान में 8 अक्टूबर को बोकारो जिला के हद में बेरमो प्रखंड के जरीडीह मोड़ पर एक दिवसीय धरना का आयोजन किया गया। धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभिन्न राजनीतिक दल व् सामाजिक संगठनों के गणमान्य जनों ने भाग लिया।
जानकारी के अनुसार 8 अक्टूबर को समाजवादी नेता स्व. जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि के अवसर पर परमवीर अब्दुल हमीद चौक जरिडीह मोड़ में शोमुवा और यूएमएफ के संयुक्त तत्वावधान में धरना का आयोजन किया गया। धरना का मुख्य उद्देश्य लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की माँग करना था।
धरना में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर शोमुवा के संरक्षक सुबोध सिंह पवार ने सोनम वांगचुक के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के सैनिकों को ठंड से बचाने के लिए सोलर टेंट का निर्माण करने वाले और जलवायु परिवर्तन पर अभूतपूर्व कार्य करने वाले सोनम वांगचुक को देशद्रोह के आरोप में जेल भेजना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। यह तानाशाही का प्रतीक है और हम सभी इसका विरोध करने यहाँ एकत्र हुए हैं।

धरना में उपस्थित वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लद्दाख के आंदोलनकारी सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। सभी ने एक स्वर में माँग की कि केंद्र सरकार लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्त्ता व् पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा करे। उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जाँच कराए। तथा लद्दाख एवं हिमालयी क्षेत्रों को छठी अनुसूची का दर्जा देते हुए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करे।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा सोनम वांगचुक को निशाना बनाना और आंदोलन को दबाने का प्रयास, क्षेत्र में अलगाव और असंतोष को बढ़ा रहा है। लद्दाख की माँग सिर्फ़ राजनीतिक नहीं, बल्कि जलवायु संरक्षण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा से जुड़ी है। हिमालयी पारिस्थितिकी को बचाने के लिए छठी अनुसूची का प्रावधान और स्थानीय भागीदारी आवश्यक है।
धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनाइटेड मिल्ली फोरम के प्रदेश महासचिव अफजल अनीस और शोमुवा के अध्यक्ष श्याम मुंडा ने संयुक्त रूप से की जबकि संचालन राजेश पासवान तथा धन्यवाद ज्ञापन मो. रफीक अंसारी ने प्रस्तुत किया। धरना कार्यक्रम में सीपीआई-एम नेता भागीरथ शर्मा, सीटू नेता मनोज पासवान, विजय भोई, सीपीआई के आफताब आलम खान, गणेश प्रसाद महतो, सुजीत घोष, भाकपा माले के भूनेश्वर केवट, राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के वीरेंद्र कुमार सिंह, पर्यावरणविद् व् दामोदर बचाओ अभियान के गुलाब प्रजापति, पर्यावरण वीद जीवन जगरनाथ, शोमुवा के जयनाथ तांती, नारी शक्ति समिति की भारती भेंगरा, राकेश नायक, मुन्ना सिंह, राजू मिश्रा सहित अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा प्रमोद कुमार रवानी, नन्हें मल्लिक, मोहम्मद सलीम, मोहम्मद सरफराज, तेज प्रताप यादव, शिवनंदन क्षत्री, सुरेश त्रिपाठी, सचदेव नाग, सागर घांसी, झामुमो के शेखर सुमन, शिव नारायण गोप, चंद्रभान सिंह, गुलबास अंसारी, सत्यनारायण सिंह, संतोष दिगार आदि उपस्थित थे। धरना के अंत में सभी संगठनों की ओर से देश के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन भेजा गया, जिसमें सोनम वांगचुक की रिहाई एवं लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग की गई।
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