सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में ऐतिहासिक 1980 के गुवा गोलीकांड के आंदोलनकारी एवं बड़ा राईका रहिवासी दरगड़ाय सिरका के निधन पर पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। बीते 8 दिसंबर को उनके निधन के बाद से गांव सहित आसपास के इलाकों में गमगीन माहौल बना हुआ है।
गुवा गोलीकांड की पीड़ा और संघर्ष के साक्षी रहे दरगड़ाय सिरका को श्रद्धांजलि देने के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतागण 31 दिसंबर को उनके गांव बड़ा राईका पहुंचे। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आंदोलनकारी चिन्हित आयोग के सदस्य भुवनेश्वर महतो, जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन, रिमू बहादुर, शंकर बोबोंगा, सोनू हरिवंश, रमेश सिरका एवं निरंजन सिरका सहित अन्य शामिल हुए। सभी ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके संघर्ष को याद किया।
इस दौरान ग्रामीणों ने दरगड़ाय सिरका की स्मृति में गांव में प्रतिमा स्थापित कर 8 दिसंबर को इन्हें भी श्रद्धांजलि दी जाए की मांग रखी। ग्रामीणों की भावना को देखते हुए जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन ने प्रतिमा स्थापना की जिम्मेदारी लेते हुए जल्द ही इसे पूरा करने का ऐलान किया।
ज्ञात हो कि सिरका उन साहसी आंदोलनकारियों में शामिल थे, जिन्होंने गुवा गोलीकांड के दौरान आदिवासियों के अधिकार और न्याय की मांग को लेकर हुए आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली उनके गाल को चीरते हुए आर-पार निकल गई थी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इस घटना के बाद उनका जीवन संघर्षों से भर गया और लंबे समय तक इलाज चलता रहा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके इलाज की जिम्मेदारी उठाई थी और उन्हें रांची के रिम्स में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद वे घर लौटे, लेकिन लगातार गिरती सेहत के कारण 8 दिसंबर को उन्होंने अंतिम सांस ली। दरगड़ाय सिरका के निधन से गुवा गोलीकांड के संघर्ष इतिहास का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया, परंतु उनका बलिदान और संघर्ष हमेशा रहिवासियों के दिलों में जीवित रहेगा।
![]()













Leave a Reply