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झामुमो नेता ने क्षेत्रीय प्रबंधन को अवार्डी मजदूरों से जुड़ा पत्र सौंपा

प्रबंधन 15 दिन में समाधान नहीं करती है तो आगामी 18 सितंबर से भूख हड़ताल-मुमताज

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा बोकारो जिला उपाध्यक्ष सह जेसीएमयू कथारा क्षेत्रीय संयुक्त सचिव मुमताज आलम ने एक सितंबर को कथारा महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचकर स्वांग वाशरी स्लरी अवार्डी मजदूरों को नियोजन देने अन्यथा हड़ताल करने से संबंधित पत्र सौंपा।

इस संबंध में जानकारी देते हुए झामुमो नेता मुमताज आलम ने बताया कि सीसीएल प्रबंधन सत्यापन के नाम पर अवार्डी मजदूरों को लगातार छलने का काम करती रही है। उन्होंने बताया कि सीसीएल मुख्यालय रांची तथा कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन की टालमटोल की नीति के कारण स्वांग वाशरी स्लरी सेल से बैठाये गये अवार्डी मजदूरों के समक्ष अब भुखमरी की स्थिति है। ऐसे में अवार्डी मजदूरों के समक्ष करो या मरो का विकल्प रह गया है।

मुमताज ने बताया कि बीते 24 अगस्त को अनुमंडल पदाधिकारी बेरमो के साथ संपन्न वार्ता में राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद व् मद्द निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद के आप्त सचिव कपील कुमार की उपस्थिति में सीसीएल कथारा क्षेत्रीय प्रबंधन एवं स्वांग वाशरी पीओ बी. मोहन बाबू के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की गयी थी।

जिसमें क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा मुख्यालय स्तर पर वार्ता के माध्यम से समस्या निराकरण कर अवार्डी मजदूरों को नियोजन देने पर सहमति बनी थी। उन्होंने बताया कि पुनः क्षेत्रीय प्रबंधन के पत्र के आलोक में बीते 29 अगस्त को अवार्डी मजदूरों को वार्ता के लिए सीसीएल मुख्यालय रांची बुलाया गया। मुख्यालय में संपन्न वार्ता के दौरान मुख्यालय महाप्रबंधक नवनीत कुमार द्वारा एकबार फिर अवार्डी मजदूरों को नियोजन को लेकर मजदूरों के सत्यापन का राग अलापा गया। साथ हीं कानूनी सलाह के बाद हीं नियोजन देने की बात कही गयी।

झामुमो नेता मुमताज ने कहा कि प्रबंधन पुर्व में अवार्डी मजदूरों द्वारा किए गये सत्यापन प्रक्रिया के भ्रमजाल में फंसाकर अवार्डी मजदूरों के केवल नियोजन को टालने में लगी है। ऐसे में यदि प्रबंधन 15 दिनों के भीतर अवार्डी मजदूरों को सत्यापित कर नियोजन नहीं देती है तो आगामी 18 सितंबर से तमाम अवार्डी मजदूर कथारा महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष एकबार फिर भूख हड़ताल पर जाने को मजबूर होगा। जिसकी जबावदेही सीसीएल प्रबंधन की होगी। मौके पर अवार्डी मजदूर बुटकी बाई, महेंद्र रजक, डिबीजन सिंह, बेनी केवट, कैला मांझी आदि उपस्थित थे।

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