Advertisement

झारखंड सरकार का ऐतिहासिक 1.58 लाख करोड़ का बजट पेश

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपये का अबुआ दिशोम बजट पेश किया। यह उनका लगातार दूसरा बजट है। इससे पहले पिछले वर्ष उन्होंने एक लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये का मूल बजट प्रस्तुत किया था, जिसमें 91,741.53 करोड़ रुपये योजना मद के लिए और 17,073.61 करोड़ रुपये केंद्रीय योजनाओं से संबद्ध थे। इस बार के बजट में सामाजिक क्षेत्र पर विशेष फोकस किया गया है।

झारखंड विधानसभा में अपने बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार का आर्थिक सहयोग जरूरी है, लेकिन अभी तक हमें सही ढंग से सहयोग नहीं प्राप्त हुआ है। कहा कि सरकार को 11 हजार करोड़ भी नहीं मिला। अनुदान की राशि भी काट दी जाती है। ऐसे में झारखंड के ऊपर वितीय बोझ बढ़ रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि भले ही केंद्र सरकार झारखंड को सहयोग न करे, लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। विपक्ष कहता रहा कि सरकार का खजाना खाली है, लेकिन सरकार ने किसी का वेतन नहीं रोका। हमने 13,000 करोड़ मईया सम्मान पर खर्च कर दिया। बावजूद इसके झारखंड के पास आज भी राशि मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य सरकार की विकासोन्मुख सोच, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और अबुआ झारखंड के संकल्प को आगे बढ़ाने वाला दस्तावेज है। कहा कि वर्तमान सरकार का लक्ष्य राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुंचाना है। यह बजट राज्य के गरीब, किसान, मजदूर, महिला, युवा, आदिवासी, दलित एवं वंचित वर्गों के सशक्तिकरण को समर्पित है।

उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के लिए पूंजीगत व्यय में वृद्धि का प्रावधान किया गया है। बजट में आधारभूत संरचना, सड़क, सिंचाई, बिजली और पेयजल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने हेतु किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार की प्राथमिकता है। बजट में मंईयां सम्मान योजना, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा तथा पोषण कार्यक्रमों के विस्तार के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। युवाओं के लिए रोजगार सृजन, कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार तथा स्वरोजगार योजनाओं को गति देने का निर्णय लिया गया है। बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जिला अस्पतालों के उन्नयन, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम हेतु नई योजनाओं का प्रस्ताव किया गया है। शिक्षा क्षेत्र में विद्यालयों की आधारभूत संरचना सुधार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा तथा उच्च शिक्षा संस्थानों को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखा गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में राज्य में ग्रामीण विकास योजनाओं, सड़क निर्माण, आवास योजनाओं और पेयजल परियोजनाओं पर विशेष बल दिया गया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार हो सके। वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए राजकोषीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का संकल्प इस बजट में खास ख्याल रखा गया है। हमारा उद्देश्य राज्य में विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पर कर‑हिस्सेदारी और अनुदान में लगभग 16,000 करोड़ रुपये (5,000 करोड़ टैक्स शेयर और 11,000 करोड़ अनुदान) कम दिया गया है। इसके अलावा जीएसटी रेट युक्तिकरण से सालाना 4,000 करोड़ की क्षति, मनरेगा (वीबीजी रामजी) के 60:40 शेयर से अतिरिक्त 5,640 करोड़ का बोझ बढ़ गया है। कहा कि राज्य सरकार का कोल कंपनियों पर ₹1.36 लाख करोड़ का बकाया है। कहा कि झारखंड में पेसा कानून बीते माह 2 जनवरी से लागू हो गया है, जिससे अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को बालू घाट, हाट‑बाज़ार प्रबंधन, लाभुक चयन जैसे अधिकार ग्राम सभा सशक्तिकरण का बड़ा संदेश है।

कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष पहली बार वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) दावोस में भाग लेकर झारखंड को वैश्विक मंच पर एक उभरते निवेश गंतव्य के रूप में पेश किया है। सरकार ने सस्टेनेबल ग्रीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और वन आधारित वैल्यू गेन को राज्य की विकास पहचान के रूप में प्रोजेक्ट किया है। इस पहल से झारखंड को हरित औद्योगिकीकरण, खनिज आधारित उद्योग और वन उत्पाद आधारित वैल्यू चेन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने का अवसर मिला है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का कुल बजट आकार 1,58,560 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। इसमें राजस्व व्यय 1,20,851.90 करोड़ रुपये तथा पूंजीगत व्यय 37,708.10 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। कहा कि पूंजीगत व्यय में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि विकास परियोजनाओं पर सरकार के विशेष फोकस को दर्शाती है। कहा कि क्षेत्रवार प्रावधान में सामान्य प्रक्षेत्र के लिए 32,055.83 करोड़, सामाजिक प्रक्षेत्र के लिए 67,459.54 करोड़ और आर्थिक प्रक्षेत्र के लिए 59,044.63 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।

संसाधन जुटाने के स्रोतों में राज्य कर से 46,000 करोड़, गैर-कर राजस्व 20,700 करोड़, केंद्रीय सहायता 18,273.66 करोड़, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी 51,236.38 करोड़, लोक ऋण 22,049.96 करोड़ तथा उधार/अग्रिम वसूली 300 करोड़ रुपये शामिल है। वहीं राजकोषीय घाटा 13,595.96 करोड़ रुपये (जीएसपीडी का 2.18 प्रतिशत) अनुमानित है। डेट-जीएसडीपी अनुपात 25.3 प्रतिशत पर नियंत्रित रखा गया है। राज्य की स्वयं की राजस्व आय वित्तीय वर्ष 2019-20 के 25,521 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2024-25 में 42,732.70 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 66,700 करोड़ होने का अनुमान है। योजना व्यय और स्थापना व्यय का अनुपात 36:64 तक पहुंच गया है, जिससे विकास कार्यों को अधिक प्राथमिकता मिली है।
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों को कर्ज से मुक्ति, समग्र कृषि विकास और आय वृद्धि है।

पीएलएफएस के अनुसार कृषि में रोजगार 44.3 प्रतिशत से बढ़कर 50.4 प्रतिशत हुआ है। बिरसा बीज उत्पादन योजना का आवंटन 95 करोड़ से बढ़ाकर 145 करोड़ किया गया है। मृदा एवं जल संरक्षण के लिए बंजर भूमि राइस फैलो और जलनिधि” योजनाओं पर 475.50 करोड़ का प्रावधान है। सौर ऊर्जा चालित सिंचाई के लिए 75 करोड़ तथा कृषि यंत्र वितरण पर 80 करोड़ रुपये निर्धारित है। झारखंड मिलेट मिशन के लिए 25 करोड़ और नकदी फसल विकास के लिए 19.88 करोड़ का प्रावधान है।

कहा कि इसी क्रम में उद्यान, मधुमक्खी, लाह, हाईटेक पार्क और शहरी फार्मिंग पर 245.80 करोड़ तथा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना पर लगभग 481.35 करोड़ आवंटित किए गए हैं। फसल बीमा योजना के लिए 400 करोड़ निर्धारित हैं। भंडारण संरचना, कोल्ड रूम और गोदाम निर्माण के लिए लगभग 322 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मत्स्य विकास पर 106 करोड़ तथा कृषि-संबद्ध कुल बजट 4,884.20 करोड़ रखा गया है। इसी प्रकार मनरेगा के तहत 10 करोड़ से अधिक मानव-दिवस सृजित किए गए।

अबुआ आवास योजना के अंतर्गत 6.33 लाख आवास स्वीकृत हुए, जिनमें 1.88 लाख पूर्ण हो चुके हैं। आगामी वर्ष के लिए 4,100 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। सखी मंडल उत्पादों के लिए पलाश ब्रांड पर 66 करोड़ तथा महिला किसान सशक्तिकरण योजनाओं पर 70 करोड़ का प्रावधान है। कहा कि ग्रामीण विकास का कुल बजट 12,346.90 करोड़ है। सिंचाई परियोजनाओं पर 1,137.10 करोड़ और लघु सिंचाई के लिए 215 करोड़ का प्रावधान है। अमानत बराज पुनर्जीवन से 12,856 हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य है। जल संसाधन विभाग का कुल बजट 2,714.71 करोड़ है।

वित्तमंत्री ने बताया कि बजट में पंचायत सचिवालय सुदृढ़ीकरण हेतु 209 करोड़ और 15वें वित्त आयोग से 1,340 करोड़ का अनुदान प्रस्तावित है। कहा कि पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर 216 करोड़ अतिरिक्त दिए गए हैं। कुल बजट 2,283.25 करोड़ है। बजट में मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना के तहत (18-50 वर्ष की महिलाओं को) प्रति माह 2,500 रुपये दिए जाएंगे, जिसके लिए 14,065.57 करोड़ का प्रावधान है। सर्वजन पेंशन योजना पर 3,517.23 करोड़ तथा राष्ट्रीय पेंशन योजनाओं पर 1,463.58 करोड़ निर्धारित है। आंगनबाड़ी भवन निर्माण, पोषाहार, यूनिफॉर्म, किशोरी पोषण और अन्य योजनाओं सहित कुल 22,995.69 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है।

उन्होंने बताया कि राज्य में 80 उत्कृष्ट विद्यालय और 325 लीडर स्कूल संचालित हैं। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा के लिए 16,251.43 करोड़ तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 2,564.45 करोड़ का प्रावधान है। नई पाठ्य पुस्तकें, शिक्षक प्रशिक्षण, आईआईटी/एनआईटी मॉडल पर तकनीकी संस्थान उन्नयन और नए विश्वविद्यालय/कॉलेज की स्थापना पर जोर दिया गया है।

कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार कल्याण को ध्यान में रखकर बजट में कैंसर उपचार के लिए 200 करोड़ की विशेष योजना, मेडिकल कॉलेजों में पीईटी-सीटी और कैथ लैब स्थापना, एमबीबीएस सीटों में वृद्धि तथा 750 अबुआ दवाखाना खोलने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य बजट 7,990.30 करोड़ है। कहा कि जल जीवन मिशन के तहत राज्य के 34.46 लाख परिवारों को नल कनेक्शन मिला है। पेयजल एवं स्वच्छता पर 5,194.53 करोड़ का प्रावधान है। धान बोनस, दाल वितरण, नमक योजना, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना और धोती-साड़ी-लुंगी वितरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस मद में विभागीय बजट 2,887.27 करोड़ है।

कहा कि ई-श्रम पर 98.17 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। कौशल विकास के तहत लाखों युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए गए है। एआई कोर्स शुरू करने की योजना है। विभागीय बजट 1,168.73 करोड़ है। वित्तमंत्री के अनुसार बजट में छात्रवृत्ति, मॉडल हॉस्टल, साइकिल योजना और जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापना जैसे कदम उठाए गए हैं। विभाग का कुल बजट 3,568.19 करोड़ है। कहा कि राज्य के 29.76 प्रतिशत क्षेत्र में वन आच्छादन है। वहीं 2.60 करोड़ पौधारोपण लक्ष्य और इको-टूरिज्म विकास योजनाओं के साथ 1,544.75 करोड़ का प्रावधान है।

कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क 15,066 किमी तक विस्तारित हुआ है। पथ निर्माण विभाग को 6,601.28 करोड़ और ग्रामीण कार्य विभाग को 5,081.74 करोड़ मिले हैं। ऊर्जा क्षेत्र में 200 यूनिट मुफ्त बिजली, 4,000 एमडब्ल्यू पतरातु प्लांट और नवीकरणीय ऊर्जा सब्सिडी सहित कुल 11,197.89 करोड़ का बजट है। उद्योग, निवेश और पर्यटन को लेकर 1,24,230 करोड़ निवेश प्रस्ताव और 45,000 रोजगार संभावनाएँ सामने आई है। उद्योग विभाग को 541.30 करोड़ और पर्यटन विभाग को 361.67 करोड़ का प्रावधान है।

पीएम आवास शहरी सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए 3,919.40 करोड़ का बजट निर्धारित है। ई-गवर्नेंस पर 174.95 करोड़ और आईटी विभाग पर 328.99 करोड़ का प्रावधान है। गृह, कारा और आपदा प्रबंधन पर कुल 11,038.53 करोड़ निर्धारित हैं। कहा कि कुल योजना आकार 1,00,891 करोड़ है। बाल बजट 10,793.16 करोड़ और जेंडर बजट 34,211.27 करोड़ निर्धारित है। यह बजट सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि विकास, बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक निवेश के संतुलित विस्तार पर केंद्रित है। कहा कि सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए समावेशी और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम बढ़ाने का प्रयास किया है।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *