एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। वित्तीय वर्ष 2026-27 का झारखंड सरकार का बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक प्रबंधन और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का समन्वित घोषणा पत्र है।
उक्त बातें झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय शंकर नायक ने 24 फरवरी को कही। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि यह विश्वास है, संकल्प है और यह झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की ठोस आधारशिला है। उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,58,560 करोड़ का बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि झारखंड की सरकार चुनौतियों से घबराने वाली नहीं है। यह बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक प्रबंधन और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का समन्वित घोषणा पत्र है।
उन्होंने बताया कि झारखंड विधानसभा में बजट भाषण की शुरुआत वीर शहीदों और झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देकर की गई। यह संकेत था कि यह सरकार विकास को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक चेतना के साथ जोड़कर देखती है। कहा कि बजट राज्य की वित्तीय क्षमता और प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है। कहा कि पिछले वर्षों में बजट आकार में क्रमिक वृद्धि हुई है, जो बताती है कि राज्य का आंतरिक राजस्व संग्रह बढ़ा है। खनिज संसाधनों से आय में सुधार हुआ है। कर प्रशासन में पारदर्शिता आई है। पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी गई है। इतने बड़े बजट का अर्थ है कि सरकार विकास की गति को धीमा नहीं, बल्कि तेज करना चाहती है। कहा कि जब संसाधनों पर दबाव हो, संघीय सहयोग में असंतुलन हो और आर्थिक चुनौतियाँ सामने हो तब नेतृत्व की असली परीक्षा होती है।
नायक ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत ₹1,58,560 करोड़ का झारखंड बजट इसी परीक्षा में खरा उतरने का दस्तावेज़ है। कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय और जनभागीदारी के संकल्प का सशक्त घोषणापत्र है। जो बताता है कि चुनौतियाँ चाहे जितनी हों, विकास की रफ्तार नहीं थमेगी। केंद्र से ₹5,000 करोड़ की लंबित हिस्सेदारी और जीएसटी से अनुमानित ₹5,640 करोड़ के नुकसान के बावजूद सामाजिक न्याय, पूंजीगत निवेश और बाल बजट जैसी ऐतिहासिक पहल के साथ राज्य ने विकास की रफ्तार को नई मजबूती दी है।
नायक ने बजट पुर्व राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा यह स्वीकार किया गया कि केंद्र का सहयोग आवश्यक है, परंतु राज्य की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। निष्कर्ष यह कि संघर्ष से सशक्त भविष्य की ओर ₹1,58,560 करोड़ का यह बजट झारखंड की विकास गाथा का नया अध्याय है।
सामाजिक न्याय, वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत निवेश, ग्रामीण और शहरी संतुलन, बच्चों और युवाओं पर विशेष ध्यान आदि पहलुओं का समन्वय इस बजट को दूरदर्शी बनाता है। केंद्र से अपेक्षित ₹5,000 करोड़ की लंबित राशि और जीएसटी से ₹5,640 करोड़ के अनुमानित नुकसान के बावजूद विकास की गति बनाए रखना इस सरकार की प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि झारखंड आज संसाधनों की धरती से आगे बढ़कर अवसरों की धरती बनने की दिशा में अग्रसर है। यदि यही नीति, पारदर्शिता और समावेशी दृष्टिकोण जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में झारखंड केवल खनिज संपदा के लिए नहीं, बल्कि मानव विकास सूचकांकों और आर्थिक प्रगति के लिए भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। यह बजट केवल आंकड़ा नहीं यह विश्वास है, यह संकल्प है और यह झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की ठोस आधारशिला है।
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