जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षित होना जरूरी है-जीएम
बिनोद बाबू के बताए मार्ग पर चलकर ही झारखंड को नई दिशा दी जा सकती है-हीरालाल
एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में मकोली मोड़ स्थित बिनोद बिहारी महतो चौक पर झामुमो फुसरो नगर कमिटि द्वारा 23 सितंबर को झारखंड आंदोलनकारी व् पुर्व सांसद स्व. बिनोद बिहारी महतो की 102वीं जन्म जयंती मनायी गयी। अध्यक्षता झामुमो फुसरो नगर अध्यक्ष दीपक महतो तथा संचालन नगर सचिव महताब खान ने किया।
जयंती समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में सीसीएल ढोरी क्षेत्र के जीएम रंजय सिन्हा व विशिष्ट अतिथि झामुमो केंद्रीय कमिटी सदस्य हीरालाल मांझी, जयनारायण महतो, अखिलेश महतो उर्फ राजू महतो, बोकारो महा lनगर अध्यक्ष मंटू यादव आदि ने स्व. विनोद बिहारी महतो की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर उन्हें याद किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि जीएम सिन्हा ने कहा कि वे सच्चे अर्थो में महापुरुष थे। कहा कि दिवंगत बिनोद बाबू ने धनबाद में एक फुटबाल टूर्नामेंट में पढ़ो, खेलो और लड़ो का नारा दिए थे। उनके अनुसार जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षित होना जरूरी है। सामाजिक कार्य करने के कारण ही वे आज भी हमसबो के दिलों में बसे हैं। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय सदस्य हीरालाल मांझी ने कहा कि स्व. बिनोद बाबू आदर्श और प्रेरणा के तौर पर आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। बिनोद बाबू के बताए मार्ग पर चलकर ही झारखंड को नई दिशा दी जा सकती है।

यहां झामुमो केंद्रीय सदस्य जयनारायण महतो ने कहा कि बिनोद बिहारी महतो गरीबों के रहनुमा थे। उन्होंने समाज को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। केंद्रीय सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू महतो और बोकारो महानगर अध्यक्ष मंटू यादव ने कहा कि बिनोद बाबू ने अपने सरल, मृदभाषी एवं गरीबों, शोषितों के हमदर्द स्वभाव के चलते तीन बार विधायक और एक बार सांसद रहे। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की और झारखंड आंदोलन को धार दी। स्व. बिनोद बिहारी महतो झारखंड आंदोलन के पुरोधा थे।
इनके सामाजिक, राजनीतिक योगदान को हमेशा गर्व से याद किया जाता रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य खनिज संपदा से परिपूर्ण होते हुए बहुत पिछड़ा है। इसी को देखते हुए विनोद बाबू ने झारखंड वासियों से पढ़ो और लड़ो का नारा दिया। वर्तमान में राज्य सरकार विनोद बाबू के सपनों को साकार करते हुए राज्य का चौमुखी विकास के लिए कदम बढ़ा चुका है।फुसरो नगर अध्यक्ष दीपक महतो ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन काल में कुल 32 स्कूल -कॉलेज की स्थापना कर शिक्षा की अलख जगाई थी। जबकि झारखंड आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था।
झारखंड आंदोलन को नई दिशा देने के साथ-साथ शिक्षा के प्रसार को भी वे तत्पर रहे। उनकी सोच थी कि जबतक आमजन शिक्षित नहीं होंगे, तबतक समाज में विकास की रोशनी संभव नहीं होगा। शिक्षित होने के बाद ही अपना वाजिब हक हम प्राप्त कर पाएंगे।
जयंती समारोह के अवसर पर ढोरी क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी मानव संसाधन कुमारी माला, एरिया सिक्योरिटी ऑफिसर सुरेश सिंह सहित वरीय झामुमो नेता अनिल अग्रवाल, जयनाथ मेहता, भोलू खान, पंकज महतो, मदन महतो, रंजीत महतो, पानबाबू केवट, शिव धनी पटेल, बैजनाथ महतो, सोहनलाल मांझी, सूरज गिरि, राकेश सुपन, विक्की महतो, मुन्ना उरांव, लालू गिरि, हरिनारायण सिंह, राम अवतार सिंह, वीरेंद्र महतो, बनवीर मिश्रा, टेकनारायण महतो, रणधीर राम, अजय साव, जवाहरलाल यादव आदि मौजूद थे।
एक अन्य जानकारी के अनुसार झामुमो उलगुलान द्वारा जयंती समारोह के अवसर पर मकोली मोड़ में विनोद बिहारी महतो की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर उन्हें याद किया गया। यहां वरिष्ठ नेता नरेश महतो एवं केंद्रीय संगठन मंत्री कृष्णा थापा ने कहा कि बिनोद बाबू ने शोषण मुक्त झारखंड बनाने पर जोर दिया था। यहां शंभू महतो, बसंत सोनी, किरण देवी आदि मौजूद थे।
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