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जनाधिकार मंच उपाध्यक्ष ने की वांगचुक की गिरफ्तारी के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान

केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों का होगा कड़ा विरोध-विजय शंकर नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। जनाधिकार मंच सोनम वांगचुक की अवैध गिरफ्तारी के विरुद्ध एकजुटता का आह्वान करती है। केंद्र सरकार की दमनकारी नीतियों का कड़ा विरोध किया जायेगा। उपरोक्त बाते 3 अक्टूबर को आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने लद्दाख के प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक की बीते माह 26 सितंबर को लेह पुलिस द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत की गई गिरफ्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया मे कही।

उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी न केवल एक निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने वाली केंद्र सरकार की दमनकारी मानसिकता का प्रतीक है। कहा कि यह गिरफ्तारी लद्दाख की शांतिपूर्ण मांगों यथा राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत संरक्षण को कुचलने का कुटिल प्रयास है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के बजाय सत्ता के अहंकार को मजबूत करने का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जनाधिकार मंच इस कृत्य की कड़ी निंदा करता हैं और सोनम वांगचुक की तत्काल एवं बिना शर्त रिहाई की मांग करता है।

नायक ने कहा कि वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को संघ राज्य क्षेत्र (यूनियन टेरिटरी) बनाए जाने का वांगचुक ने स्वागत किया था, लेकिन केंद्र सरकार के वादों (जैसे स्थानीय नौकरियां, भूमि संरक्षण और विकास) के पूरा न होने पर उन्होंने शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया। मार्च 2024 में उन्होंने 21 दिनों का जलवायु उपवास किया और हाल ही में 10 सितंबर से 15 दिनों का अनशन राज्य और छठी अनुसूची की मांग के लिए। उनके नेतृत्व में नई लद्दाख मूवमेंट (एनएलएम) ने पर्यावरण, शिक्षा और स्थानीय अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

नायक ने कहा कि आंदोलनकारी वांगचुक का इतिहास हिंसा का नहीं, बल्कि गांधीवादी अहिंसा और सतत विकास का है। एक ऐसा इतिहास जो केंद्र सरकार को आज असहज कर रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम एनएसए लगाना, एसईसीएमओएल का एफसीआरए रद्द करना और वांगचुक को जोधपुर जेल (लद्दाख से 1,000 किमी दूर) स्थानांतरित करना लोकतंत्र के बजाय तानाशाही का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी वांगचुक को पाकिस्तानी एजेंट कहना हास्यास्पद है। यह केंद्र सरकार की विफलता को छिपाने का स्कैपगोट तिकड़म है। सरकार द्वारा लद्दाख को युटी बनाए 6 वर्ष पूरे हो चुके, लेकिन नौकरियां, भूमि अधिकार और छठी अनुसूची के वादे झूठे साबित हुए।

एलएबी-केडीए के साथ चल रही वार्ताओं को तोड़ने के बजाय, सरकार ने अरब स्प्रिंग जैसे बयानों को बहाना बनाकर दमन चुना। यह वही सरकार है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली खनन और पर्यटन परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है, जबकि वांगचुक जैसे कार्यकर्ता इन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे।

उन्होंने मांग की कि सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई और एनएसए के तहत सभी आरोपों को वापस लेने, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने, क्षेत्र से कर्फ्यू हटाना, इंटरनेट बहाल करना और घायलों को न्यायपूर्ण मुआवजा, एलएबी-केडीए के साथ पारदर्शी वार्ता, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे सरकार। नायक ने कहा कि हम लद्दाख के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों से अपील करते हैं कि शांतिपूर्ण विरोध जारी रखें। राष्ट्रीय स्तर पर संगठनों से एकजुटता का आह्वान करते हैं। कहा कि सोनम वांगचुक अकेले नहीं, वे लद्दाख की आत्मा हैं।

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