पंचायत समिति सदस्य ने दी बिजली विभाग के अधिकारी को फोन पर जानकारी
एस. पी. सक्सेना/लातेहार (झारखंड)। झारखंड का एक ऐसा गांव है जहां चार साल पूर्व ट्रांसफार्मर जलने की सूचना राज्य के विद्युत विभाग को अबतक नहीं है। जिसके कारण उक्त गांव के रहिवासी पिछले चार साल से अंधेरे में रहने को विवश है।
जानकारी के अनुसार लातेहार जिला के हद में चंदवा प्रखंड के बोदा पंचायत का ग्राम लुकूईया का टोला जामूनगढ़ा में बिजली विभाग की ओर से विद्युत आपूर्ति के लिए 16 केबी का ट्रांसफार्मर लगाया गया था। यह ट्रांसफार्मर पिछले चार साल से जला हुआ है।
सूचना मिलने पर कामता पंचायत के पंचायत समिति सदस्य अयुब खान जामुनगढ़ा गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से मिलकर जले ट्रांसफार्मर के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को फोन पर मामले से उन्हें अवगत कराया। साथ हीं इस समस्या पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए ट्रांसफार्मर बदलकर गांव में बिजली बहाल करने की मांग की है।
पंसस खान के अनुसार जामुनगढ़ा गांव के ग्रामीण गोंदल गंझु, हसमूद्दीन अंसारी, अशोक गंझु, दिनेश गंझू, बुधन गंझु, भोला गंझु, बिहारी गंझू, शरतेश गंझु, विगन गंझु, झुरण गंझु, संजय गंझु, पुरन गंझु, बैजनाथ गंझु, फगुना गंझु, रामटहल गंझु, एतवा गंझु, सुनिल गंझु, अनिल गंझु, दिलु गंझू, सालदेन गंझु, लिलु गंझु, कुंदन गंझु, बकु गंझु, सुरजन तुरी, करिमन गंझु, बसंत तुरी, सुरेश तुरी, नरेश तुरी, आदि।
राजेश तुरी, बिजेन्द्र तुरी, उमेश तुरी, पिन्टू तुरी, गोबर्धन गंझु, देवचरण गंझु, बुटन गंझु, सोहराई गंझु, महाबिर गंझु, सहाबीर गंझु, लिलमतिया देवी ने बताया कि जामुनगढ़ा गांव में लगा ट्रांसफार्मर लगभग चार साल से जला हुआ है। बिजली नहीं रहने से गांव अंधेरे में डुबा हुआ है। उक्त टोले के पचीस परिवार चार वर्ष से बिजली के लिए जूझ रहे हैं।
खान ने बताया कि उक्त टोले में अनुसूचित जनजाति समुदाय के 20 घर और अनुसूचित जाति के 5 घरो में कुल जनसंख्या लगभग 150 निवास करते हैं। सभी घरों में बिजली का कनेक्शन है। वे बिजली का बिल भी भरते हैं, लेकिन बिजली नहीं रहती है।
उन्होंने बताया कि इस भीषण गर्मी में जब आसमान से आग के गोले बरस रहे हैं। गर्मी का पारा हाई है। यहां रहनेवाले रहिवासी कितना बेहाल होंगे, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। बताया कि ट्रांसफार्मर को न बदले जाने को लेकर यहां के ग्रामीणों का रोष गहराता जा रहा है।
ज्ञात हो कि, बिजली के अभाव में एक तरफ जहां आमजन चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं। वहीं रात्रि में यहां के बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित है। मोबाइल की बैटरी चार्ज करने के लिए ग्रामीण रहिवासी दुसरे गांव में इधर उधर भटकते रहते हैं। मोटर नहीं चलने से खेती गृहस्थी पर भी इसका असर पड़ रहा है।
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