स्वच्छता अभियान का उड़ाई जा रही धज्जियाँ
फिरोज आलम/जैनामोड़(बोकारो)। जरीडीह प्रखंड (Jaridih block) के हद में जैनामोड़ के एकमात्र रेफरल अस्पताल के रूप में मुख्य सड़क एन एच 23 पर स्थित है। इस अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों रहिवासी अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। अस्पताल प्रबंधक को स्वास्थ्य स्वच्छता के लिए सरकार द्वारा समय समय पर अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इस रूपये को अस्पताल प्रबंधन के द्वारा महज खाना पूर्ति कर रूपये का बंदरबांट किया जाता है। यही कारण है कि पुरा अस्पताल परिसर जंगल झार से पटा है।
जानकारी के अनुसार उक्त अस्पताल परिसर के चारों ओर बडे़ – बड़े घास पतवार सहित झाड़ियां अस्पताल की दुर्दशा को दर्शाता है। फोटो में देखने से ही लगता है कि झाड़ीयों के कारण अस्पताल परिसर में लगा चापाकल छुप गये हैं। अस्पताल कर्मियों के अनुसार रात के अंधेरे में चापाकल पर जाना भी संभव नहीं होता है। जबकि अस्पताल प्रभारी का आवास भी परिसर के अंदर स्थित है। इसके अलावा यहां खुलेआम स्वास्थ्य- स्वच्छता अभियान की धज्जियाँ उड़ रही है। अस्पताल में इलाज कराने वाले जरुरतमंदो को मजबूर होकर प्यासा ही रहना पड़ता है या सारी गंदगी भरे रास्ते पर झाड़ियो को हटाते- चीरते हुए पानी लाना पड़ता है। भरे गंदगी के कारण कभी भी यहां बड़ी घटना घट सकती है। इस तरह की लापरवाही से अस्पताल प्रबंधन बेखौफ, सरकार की स्वच्छता अभियान के नाम पर आबंटित राशि का बंदरबांट करने में लगी है।
अस्पताल प्रभारी डाॅक्टर जीतेंद्र कुमार सिंह के लापरवाही का परिणाम स्वरूप दुर्दशा अस्पताल परिसर की बनी हुई है। स्थानीय रहिवासियों के द्वारा बोकारो उपायुक्त राजेश सिंह, सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार पाठक सहित स्वास्थ्य सचिव झारखंड सरकार से अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच कर बंदरबांट पर रोक लगाने और पुरे परिसर की साफ- सफाई कराये जाने की मांग की गयी है।
306 total views, 1 views today