एस.पी.सक्सेना/गिरिडीह (झारखंड)। जैन धर्मावलंबियों का सबसे पवित्र तीर्थस्थल गिरिडीह जिला (Giridih District) के हद में मधुवन स्थित पारसनाथ माना जाता है।
इसे जैन धर्मावलंबी पाश्वर्नाथ नाम से भी संबोधित करते रहे हैं। इसी पाश्वर्नाथ के मधुवन में चौमासा अष्टयामी व्रत से आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज अब भी विराजमान हैं।
उक्त जानकारी श्वेतांबर जैन समाज के मीडिया प्रभारी हरीश दोशी उर्फ राजू भाई ने 9 अक्टूबर को मुनि महाराज की संकेत सहमति प्राप्त होने के बाद कही।
राजू भाई ने बताया कि विशुद्ध सागर जी के अनन्य शिष्य महातपस्वी प्रथमानुयोग के कुशल ज्ञाता मौन साधनारत मुनिश्री 108 अनुत्तर सागर जी सिंह निस्कीड़ित व्रत की कठिन साधना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अनुत्तर सागर जी 186 दिन में 153 उपवास और 33 पारणा होगी।
जबकि वर्ष 2020 में 217 निर्जल कर चुके हैं। राजू भाई ने बताया कि वर्ष 2021 में उनका 240 से उपर निर्जल उपवास करने का लक्ष्य है। जो पूर्णता की ओर है।
राजू भाई ने बताया कि अनुत्तर सागर जी द्वारा चौसठ रिद्धि व्रत के 64 उपवास, तपशुद्धि के 78, दु:खहरण के 68, सुखकारण के 68, सर्वतो भद्र के 78, शान्तकुंभ के 45, नवकार के 35, बज्रमद्ध के 28, नक्षत्रमाला के 27, भावना विधि के 25, पस्चविस्नती कल्याण माला के 25, दर्शन विशुद्धी के 24, दिपमालिका के 24, तापोंजली के 24, तीर्थकर व्रत के 24, बारह बिजोरा के 24, समकत्व चतुवीस्ती के 24 आदि कई तरह के व्रण विधि-विधान के साथ पूर्ण कर चुके हैं।
राजू भाई के अनुसार इन सभी व्रतों के साथ जैन मुनि अनुत्तर सागर जी महाराज ने चारित्र शुद्धि व्रत के 11 सौ उपवास निर्जला पूर्ण कर लिया है।
शेष 134 दिन जल्द ही पूर्ण हो जाएगा। राजू भाई ने बताया कि अनुत्तर सागर जी महाराज ने आगामी 22 मई 2022 तक मौन रहने का संकेत दिया है। मौके पर नरेश जैन सहित जैन समाज के दर्जनों संत महात्मन उपस्थित थे।
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