प्रशासन,सरकार व जिलेवासियों के लिए यह राष्ट्रीय शर्म का मामला ना बन जाय।

संतोष कुमार/वैशाली बिहार। अभी सबसे महतवपूर्ण हमारे लिए सुरक्षा मानकों के अनुकूल आचरण है। हिन्दुस्तान ने बहुत से तूफ़ानों का सामना पहले भी किया है। आज कोरोना से भी साहस के साथ देश जंग लड़ रहा। लेकिन यह शक्ति देश वासियों में कैसे समाहित हो सकी कि आपात स्थितियों में हम अपनी एक जुटता का प्रमाण देते आए हैं। आगे भी देने की वायदा जारी है। तो निःसंदेह ही यह नेता जी सुभाष, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी सरदार भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद और अन्य ग्रंथों के अनुसार भीष्म आदि पूर्वजों की साहसिक और मर्यादित कृतियों का हमारे मानस पटल पर प्रभाव ही कहा जाना चाहिए। लेकिन हम उन्हें ही सम्मान देने में पीछे रह जाते हैं। यह राष्ट्रीय शर्म का विषय न बनने पाए। इसके लिए सरकार। प्रशासन और साथ ही जिले वासियों को भी निष्ठा दिखानी होगी। और बूब ना धर्मशाला के कोठरी के फर्श से इन जैसे महान विभूतियों की प्रतिमा खंड को पूर्णतः स्थापित करना होगा। जहां इन्हे स्थापित करने की चर्चा है। यानी गांधी आश्रम। ऐसी सोच आमजनों में भी पल रही कि ऐसा होने से जिले का मान बढ़ेगा। मालूम हो कि कई महीनों से इन प्रतिमाओं को धर्मशाला जो मकान का नाम भी हो सकता है। उसकी कोठरी में प्रतिमाएं कपड़े से ढक कर रखी गई है। हालांकि मूर्तियों को सुरक्षित देखा गया है और वहां संभव सम्मान मिल भी रहा। लेकिन हाजीपुर (Hajipur) है के प्रतिष्ठित कारोबारी श्री बूबना ने हाल में बताया कि अब उन्हें यह लक्ष्य निराश कर रहा। उन्होंने कई नाम भी गिनाए। जो सामाजिक रूप से और राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण नाम कहा जा सकता है। उनमें से कई दिवंगत भी हो गए। परंतु महान लोगों की यथा बापू सरीखे अन्य की आदम कद प्रतिमा को गांधी आश्रम के दीप नारायण संग्रहालय में स्थापित नहीं किया जा सका। जो नए पार्क के दक्षिण दिशा वाली बिल्डिंग में एक पुस्तकालय भवन के भीतर ही अवस्थित है। उक्त बुजुर्ग और खास तरह के विशेषज्ञ मस्तिष्क वाले श्री बूबना जी की पवित्र राष्ट्रीय भावनाओं का यह एक सम्मान होने के अलावा उनके प्रति एक बेहतर राष्ट्रीय श्रद्धांजलि।भी होगी, जिन्होंने प्रयास और संघर्ष तो स्थापना को लेकर किया। लेकिन सफलता से पूर्व ही संसार छोड़ गए। कुछ सामाजिक रूप से जानकार लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अभी भी वक़्त है। भूल में सुधार की प्रक्रिया की जा सकती है और सभी के साथ से मूर्तियों।को स्थापित करने की दिशा में ठोस पहल हो। ऐसा ही अधिकांश लोगों की भावनाओं में दिखता है। उनमें से एक नाम कुतुबपुर निवासी सह पूर्व सांसद प्रतिनिधि लोजपा अवधेश प्रसाद सिंह का भी है। इन्होंने भी काफी संघर्ष किया है।

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