बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाएगा सहयोगिनी, जिला प्रशासन से मांगा सहयोग
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बोकारो जिला के हद में कसमार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड प्रमुख नियोती डे, अंचलाधिकारी सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह सहित बालिकाओं ने दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर बोकारो जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा व बाल विवाह के खात्मे के लिए काम कर रहे नागरिक समाज संगठन सहयोगिनी ने बोकारो उपयुक्त को सौंपे गए एक ज्ञापन में जिले में दिवाली से आगामी 26 जनवरी तक बाल विवाह के खिलाफ सघन और व्यापक अभियान चलाने में सहयोग मांगा।
ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के लगभग एक साल पूरे होने जा रहे हैं और जिला प्रशासन के नेतृत्व में बोकारो में इसे मिली सफलताओं को और गति देने के लिए इस विशेष अभियान की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
सहयोगिनी के निदेशक गौतम सागर ने कहा कि जिले में अब भी बाल विवाह की समस्या मौजूद है। इसी के मद्देनजर दीपावली से लेकर 26 जनवरी 2026 तक जिले में बाल विवाह के खिलाफ एक व्यापक और सघन अभियान में जिला प्रशासन का सहयोग मांगा गया है। मुख्य अतिथि प्रमुख नियोती दे ने अपने संबोधन में कहा कि आज की बालिका कल की नींव है। हमें उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का अधिकार देना होगा।
हर बेटी में अनंत संभावनाएँ हैं, बस जरूरत है उन्हें अवसर और प्रोत्साहन देने की। कहा कि सहयोगिनी संस्था इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। विशेष अतिथि अंचल अधिकारी नरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बालिकाओं को सशक्त बनाना समाज की सबसे बड़ी पूँजी है। हर माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी बेटियाँ आत्मनिर्भर बनें और अपने सपनों को साकार करें।

महिला सुपरवाइजर सुषमा गुप्ता एवं नूतन कुमारी ने भी बालिकाओं को शिक्षा और स्वास्थ्य के महत्व पर प्रेरणादायक विचार साझा किए। सहयोगिनी बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के 450 से भी ज्यादा जिलों में काम कर रहे 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी है।
सागर ने कहा कि, हमारा मानना है कि ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण कानून पर सख्ती से अमल है और इसी के नतीजे में आमजनों की सोच में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकार व समाज एकजुट होकर प्रयास करें तो बाल विवाह की रोकथाम संभव है। इस अभियान में अग्रिम मोर्चे पर खड़े अकेले जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने ही पिछले दो सालों में सरकार, पुलिस व प्रशासन के सहयोग से देश भर में लगभग चार लाख बाल विवाह रोके और रुकवाए हैं।
ज्ञापन में मांग की गई है कि जिला प्रशासन एक सर्कुलर जारी कर विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित वर्ग जैसे पंडित, मौलवी और पादरी के अलावा इसमें सेवाएं देने वाले अन्य लोगों जैसे बैंड वाले, मैरेज हाल वाले और कैटरर्स आदि को स्पष्ट हिदायत दे कि बाल विवाह में किसी भी तरह की मदद गैरकानूनी है और इसके लिए उन पर कार्रवाई हो सकती है। ज्ञापन में उन पंचायतों जहां पिछले साल भर में एक भी बाल विवाह नहीं हुआ है, की पहचान में जिला प्रशासन से सहयोग का अनुरोध किया गया ताकि उन्हें अगले साल बाल विवाह मुक्त पंचायत घोषित किया जा सके।
इसके अलावा, जिन पंचायतों से बाल विवाह की खबरें मिली हैं, वहां जागरूकता अभियान चलाए जाएं। साथ ही, मांग की गई कि जिला प्रशासन एक सर्कुलर जारी कर हिदायत दे कि बाल विवाह में किसी भी तरह का सहयोग करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सहयोगिनी की कुमारी किरण ने पिछले एक साल में बाल विवाह की रोकथाम के मोर्चे पर अभूतपूर्व सफलताओं के लिए सरकार, जिला प्रशासन व पुलिस से मिले सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि बाल विवाह मुक्त बोकारो का सपना जल्द ही वास्तविकता में तब्दील होगा और 26 जनवरी तक चलने वाला यह अभियान बाल विवाह के खात्मे की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
अंत में बालिकाओं को सम्मानित किया गया और उन्हें शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम का संचालन सहयोगिनी संस्था की टीम ने किया और धन्यवाद संस्था की कोषाध्यक्ष सूर्यमणि देवी ने किया। मौके पर सहयोगिनी संस्था से कॉर्डिनेटर कुमारी किरण, प्रकाश कुमार महतो, अनिल हेंब्रम, सूर्यमणि देवी, मंजू कुमारी, बिनीता देवी, संगीता देवी, रेखा देवी, पुष्पा देवी सोनी कुमारी आदि मौजूद रही।
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