पहाड़ीचक स्कूल की बच्चियां जमीन पर बैठकर पढ़ने को थी विवश
विद्यालय के प्रथम प्रधानाध्यापक की याद में समारोह आयोजित
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। शिक्षा के बिना किसी अच्छे समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। गीता में श्रीकृष्ण ने शब्द यज्ञ यानी ज्ञान यज्ञ को सबसे श्रेष्ठ बताया है। ज्ञान वह प्रकाश है जो भौतिक अज्ञानता को दूर कर व्यक्ति के भीतर विवेक, आत्मसम्मान और वैज्ञानिक चेतना भर देता है। इसके लिए सिर्फ सरकार पर निर्भर रहना जरूरी नहीं।सामाजिक सहभागिता से भी सतत् शिक्षा का अलख जगाया जा सकता है।
सारण जिला के हद में सोनपुर नगर पंचायत के पहाड़ीचक कन्या मध्य विद्यालय के प्रथम प्रधानाध्यापक स्व.केशव प्रसाद अंबष्ठ की स्मृति में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए 30 जून को मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सुरेन्द्र मानपुरी ने उपरोक्त बातें कही। मौके पर बेल्जियम में रह रहे भारतीय समाज ने इस विद्यालय में प्राथमिक कक्षा की बच्चियों के बैठने के लिए एक लाख रुपए के बेंच-डेस्क प्रदान किए। इसके अलावा पढ़नेवाली बच्चियों के बीच अभ्यास पुस्तिका और कलम का वितरण किया गया।
समारोह की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक नरेंद्र कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर उक्त विद्यालय के सेवानिवृत प्रधानाध्यापिका एवं विद्यालय के प्रथम प्रधानाध्यापक स्व. केशव कुमार अंबष्ठ की धर्म पत्नी रुक्मिणी कुमारी ने कहा कि वे इसी विद्यालय में पढ़ी और बाद में प्रधानाध्यापिका भी रहीं। इसी विद्यालय में उनके पति प्रधानाध्यापक रहे और आज भी एक बेटी इस विद्यालय में शिक्षिका हैं। कहा कि इस विद्यालय से उनका गहरा लगाव है।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों से ही बौद्धिक समाज निकलता है। इसलिए आज विद्यालयों को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सितारों के आगे जहां और भी है।
समारोह को हरिहरनाथ मंदिर न्यास के कोषाध्यक्ष निर्भय कुमार ने बाढ़े पुत पिता के धर्मे कहावत के माध्यम से कहा कि स्व. केशव प्रसाद अंबष्ठ जैसे सुसंस्कृत विचार के थे वैसा ही उनकी संतान गौरव है। गौरव को उनके पिता से अच्छे संस्कार मिले।
यह केवल इसी विद्यालय के लिए संदेश नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए संदेश है। यहां के रहिवासी दूर देश में हैं। उनके लिए भी यह संदेश है। भले यह छोटा सा प्रयास है पर इसका संदेश बड़ा है। समारोह को सेवा निवृत शिक्षक मदन मोहन प्रसाद, राकेश कुमार सिंह, अरविन्द कुमार, वार्ड पार्षद सुनील कुमार, मनीष कुमार, कन्हैयाजी, जय प्रकाश आदि ने भी संबोधित किया।
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