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पाश्चात् सभ्यता को अपनाने से दूर रहें भारतीय नारियां-नीलम शास्त्री

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। पाश्चात् सभ्यता की चकाचौंध दुनियां की मकड़जाल में फंसकर आज की नारियां अपने जीवन सहित घर, परिवार को अच्छे से नहीं संवार पाती है। आज की नारियां अपनी परिवेश, अपनी पहचान को भी भूलने लगी है। एक उत्तम नारी ही घर, परिवार को संवारने में सक्षम होती है। पाश्चात्य सभ्यता के परिवेश, वेश-भूषा अपनाकर क्षणिक सुख भले ही महसूस कर ले, पर यह उसकी जीवन की कामयाबी नहीं, बर्बादी है।

उक्त बातें बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के अंगवाली गांव में आयोजित श्रीरामचरित मानस के 29 वें अधिवेशन में बीते 13 मार्च की रात्रि बेला में वाराणसी से पधारी मानस कोकिला नीलम शास्त्री ने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसी दास ने मानस के प्रसंगों में कई सती नारियों के चरित्र का वर्णन किया है। इनमें सती अनुसूया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसकी सतीत्व के प्रभाव से तीनों देवियां लक्ष्मी, सरस्वती तथा पार्वती भी घबरा गईं और अनुसूया की परीक्षा लेने धरती पर अपने तीनों देवों को अत्रीमुनि के आश्रम में वेश बदलकर चले गए, जिन्हें अपनी सतीत्व के प्रभाव से ध्यान करके तीनों को पहचान लिया। अपनी बुद्धिमता से उनकी परीक्षा में वह पूरी तरह सफल हुई।

अपने व्याख्यान में मानस कोकिला ने कहा कि आज की नारियां अपनी शक्ति को पहचाने में असफल हो रही हैं। अपनी शक्ति व कर्तव्यों को यदि पहचान लें तो परिवार को स्वर्ग बनाते हुए समाज, देश में यश प्राप्त करने में सक्षम होगी। इसी प्रसंग में संजोए हुए वस्त्रों व आभूषणों से माता सीता को संवारने को रोचक कथा उपस्थित श्रोताओं को बताई।

वाराणसी से ही पधारे मानस मार्तंड अच्युतानंद पाठकजी महराज ने प्रभु श्रीराम के भाई भरत चरित की गाथा को श्रद्धालु श्रोताओं के सम्मुख रखा। कहा कि भाई भरत अनुरागी व महात्मा हैं। प्रभु श्रीराम भरत के प्रभाव से प्रारंभ से ही अवगत हैं। सागर के एक किनारे राम परमात्मा तो दूसरे किनारे महात्मा भरत खड़े थे और बाते कर रहे थे। महात्मा संग परमात्मा की बाते अनुपम दृश्य उत्पन्न कर रहा था।

मानस मार्तंड ने भगवती सीता द्वारा प्रभु के समक्ष अपने को माता कौशल्या की आंखों की पुतली बताने की प्रसंग को बखूबी समझाया। उन्होंने आज के माता, पिता को सावधान किया कि अपनी बेटी को घर से निकलने से पहले उसकी लिवास को अवश्य देखें और प्रभु से दुआ करें कि वह सही सलामत घर लौटे। व्यास अनिल पाठक एवं समूह द्वारा संगीतमय प्रवचनों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच के बगल में बिपिन कुमार पांडेय, संस्थापक गौर बाबा, मंच संचालक संतोष नायक, प्रफुल्य चटर्जी, अध्यक्ष पवन नायक सहित समिति के अन्य कई पदेन प्रतिनिधि सक्रिय दिखे।

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