सिकुड़ते साधु गाछी की रक्षा के लिए प्रशासन को पहल करने की जरूरत
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में लगने वाला विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला लोकतांत्रिक व्यवस्था के पहले से लगता रहा है। यह मेला वैदिक, पौराणिक, ऐतिहासिक एवं पूर्ण सनातनी है। चाहे सरकारी स्तर पर उद्घाटन जिस दिन भी हो, उस उद्घाटन से आम पब्लिक को कोई मतलब नहीं। आम जनता का तो चतुर्दशी आगामी 4 नवंबर के दोपहर से ही हरिहरक्षेत्र के घाटों पर आना शुरू हो जायेगा और वे 5 नवंबर को स्नान – दान करेंगे।
सोनपुर के साधु गाछी स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य इस बार विधान सभा चुनाव को लेकर सोनपुर मेला के उद्घाटन की तिथि बढ़ाने पर खुश नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि इस मेला के आभूषण साधु – महात्मा ही हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को हरिहर क्षेत्र मेला को देखते हुए चुनाव को दो -चार दिन आगे -पीछे करना चाहिए।
साथ ही, सिकुड़ रहे साधु गाछी में संतों के ठहरने की जगह कम पड़ रही है, उसे देखते हुए सरकार के ही संरक्षण में नदी किनारे साधुओं के शिविरों का निर्माण हो। उन्होंने मेला उद्घाटन तिथि परिवर्तन पर बताया कि चुकी प्रजातंत्र से पहले से यह मेला लगता रहा है। यह मेला वैदिक, पौराणिक, ऐतिहासिक एवं पूर्ण सनातनी है। चाहे सरकारी स्तर पर उद्घाटन जिस दिन भी हो उस उद्घाटन से आम पब्लिक को कोई मतलब नहीं। आम जनता का तो चतुर्दशी 4 नवंबर के दोपहर से ही हरिहरक्षेत्र के घाटों पर आना शुरू हो जायेगा और वे 5 नवंबर को स्नान – दान करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरकार को चाहिए कि वे साधु गाछी की रक्षा करें। अथवा अन्य कोई दूसरा विकल्प सरकार को साधु -संतों के ठहराव के लिए खोजना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार के संरक्षण में मेला नखास का डाक होता है, उसी तरह सरकार के ही संरक्षण में साधुओं के शिविरों का निर्माण हो। जगह नहीं मिलने के कारण पहले जो साधु – संत शिविर लेकर आते थे, उन्होंने आना बंद कर दिया है। प्रशासन को संतों के शिविर, भजन -कीर्तन, भंडारा के लिए जगह देना चाहिए।
काली घाट के निकट हो साधु संतों के लिए शिविरों का निर्माण-धनंजय सिंह
सोनपुर माधव वार्ड संख्या 17 रहिवासी व् पंचमुखी संकटमोचन मंदिर के संयोजक धनंजय सिंह बताते हैं कि बचपन से देखता आ रहा हूं कि मेला के दौरान साधु गाछी में संतों का शिविर एवं प्रवचन पंडाल तीन स्थानों पर लगता था। एक कष्टहरिया घाट के आसपास में और दूसरा काली घाट के निकट। बताया कि आज गज – ग्राह चौक है, उससे दक्षिण संत रामलखन पथ में कबीर पंथी साधु -संतों द्वारा प्रवचन शिविर लगता था, जो कमोवेश आज भी कायम है।
बताया कि सगुण धारा के वैष्णव संतों का पंडाल कष्टहरिया घाट एवं काली घाट के आसपास लगता था, अब जगह की कमी हो गई है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि काली घाट के दक्षिण मही नदी मुहाना के बाद गंडक नदी के उभरी हुई भूमि पर साधु-संतों के लिए स्थाई या अस्थाई तौर पर शिविरों का निर्माण करे, क्योंकि बाबा हरिहरनाथ, काली मैया आदि के भक्तों व साधु -संतों से ही इस मेला की वास्तविक पहचान है।
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